September 18, 2026
Medical Curraption

अजय शास्त्री (वरिष्ठ पत्रकार व संपादक)

बीसीआर न्यूज़/नई दिल्ली: दिल्ली सरकार के अस्पतालों के लिए दवाइयों, मेडिकल उपकरणों और स्वास्थ्य सामग्री की खरीद में कथित अनियमितताओं की जांच अब तेज हो गई है। एंटी करप्शन ब्रांच ने इस मामले में दो और पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। अदालत ने दोनों को 7 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। जांच एजेंसी का कहना है कि मामले में निजी कंपनियों और अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

अब तक इस मामले में तीन पूर्व अधिकारियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें पूर्व डायरेक्टर जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज डॉ. वत्सला अग्रवाल, सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी के पूर्व डिप्टी कंट्रोलर ऑफ अकाउंट्स नीरज चोपड़ा और सीपीए के पूर्व हेड ऑफ ऑफिस डॉ. विनोद कुमार रंगा शामिल हैं। यह कार्रवाई एफआईआर नंबर 07/2026 के तहत की गई है।

आपको बताते हैं कि आखिरकार क्या है पूरा मामला, एंटी करप्शन ब्रांच के अनुसार, दिल्ली सरकार के अस्पतालों के लिए करीब 650 से 700 करोड़ रुपये की खरीद प्रक्रिया की जांच की जा रही है। आरोप है कि खरीद के नियमों में बदलाव कर कुछ चुनिंदा कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया। शुरुआती जांच में कुछ सामान की कीमतें बाजार से अधिक होने के संकेत मिले हैं, लेकिन अंतिम निष्कर्ष अभी नहीं निकला है।

जांच में दवाइयों, सर्जिकल सामान, बेड लिनेन, पोर्टेबल एक्स-रे मशीन, एनेस्थीसिया वर्कस्टेशन, सी-आर्म रेडियोलॉजी मशीन और अन्य मेडिकल उपकरणों की खरीद शामिल है। आरोप है कि टेंडर की शर्तें इस तरह बनाई गईं कि प्रतिस्पर्धा सीमित हो जाए और कुछ कंपनियों को ठेके मिल सकें।

एंटी करप्शन ब्रांच एक कथित बिचौलिए की भूमिका की भी जांच कर रही है, जिस पर अधिकारियों और निजी सप्लायरों के बीच संपर्क कराने का आरोप है।

रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज से रिकॉर्ड मंगाए गए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि खरीद से जुड़ी कोई कंपनी शेल कंपनी तो नहीं थी।

जांच एजेंसी का कहना है कि जैसे-जैसे नए सबूत मिलेंगे, अन्य लोगों से भी पूछताछ की जा सकती है। फिलहाल जांच जारी है और किसी भी निजी कंपनी की भूमिका पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है।

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