अजय शास्त्री (वरिष्ठ पत्रकार व संपादक)
दिल्ली में ईडी के पास एक शिकायत पहुंची। शुरुआत में मामला छोटा लग रहा था लेकिन जब जांच हुई तो हैरान कर देनेवाला खुलासा हुआ। विदेश से भारत में नक्सलवाद और धर्मांतरण के लिए लगभग एक अरब रुपये की फंडिंग की गई। कर्नाटक पुलिस ने असम, छत्तीसगढ़, और बेंगलुरु के कुछ लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है।
बीसीआर न्यूज़/बेंगलुरु: प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों की शिकायत पर बेंगलुरु पुलिस ने अमेरिका स्थित ईसाई मिशनरी संगठन ‘द टिमोथी इनिशिएटिव’ (TTI) के खिलाफ केस दर्ज किया है। टीटीआई के अलावा बेंगलुरु और देश के अन्य हिस्सों के छह लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया है। इन पर लगभग 95 करोड़ रुपये का इस्तेमाल करके नक्सलवाद को बढ़ावा देने और धर्म परिवर्तन के लिए फंडिंग करने का आरोप है।

यह शिकायत ED (नई दिल्ली) के सुनील कुमार सिन्हमार ने कोथानुर पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई थी। मामला ‘गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967’ (UAPA) और ‘भारतीय न्याय संहिता’ की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया गया है।
विदेश से आए डेबिट कार्ड्स
ED की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपी संगठन ने विदेशी डेबिट कार्ड के नेटवर्क का इस्तेमाल करके भारतीय वित्तीय नियमों और विदेशी योगदान कानूनों का उल्लंघन किया। कथित तौर पर पूरे भारत में 1,000 से अधिक विदेशी डेबिट कार्ड बांटे गए थे, जिनमें से कई कार्ड संतोष कुमार के नाम पर चल रहे थे।
95 करोड़ खर्च
जांचकर्ताओं को पता चला कि नवंबर 2025 और अप्रैल 2026 के बीच इन लेन-देन के माध्यम से अनुमानित 92.5 करोड़ रुपये से 95 करोड़ रुपये का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा, जनवरी 2024 और मार्च 2026 के बीच इसी तरह के तरीकों से 44 करोड़ रुपये और निकाले गए।
आदिवासियों को किया गया टारगेट
शिकायत में कहा गया है कि इन फंड्स का इस्तेमाल TTI के मल्टी-लेवल चर्च प्लांटिंग (नए चर्च स्थापित करने) और धार्मिक प्रचार मॉडल में भी किया जा रहा था, जिनका मकसद आदिवासी और संघर्ष-ग्रस्त इलाकों में कमजोर आबादी को लक्षित करना था। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने TOI को बताया कि शुरुआती जांच से पता चला है कि बड़ी मात्रा में नकद निकासी को छत्तीसगढ़ के बस्तर और धमतरी जैसे वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित इलाकों में भेजा जा रहा था।
एफआईआर में असम में छत्तीसगढ़ के लोग भी
जांचकर्ता इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या इन फंड्स का इस्तेमाल नक्सली गतिविधियों, धर्म परिवर्तन और गैर-कानूनी कामों को बढ़ावा देने के लिए किया गया था। पुलिस द्वारा नामजद आरोपियों में ग्लोरियो अपार्टमेंट्स-डोड्डागुब्बी रोड के जोनाथन एस राजन, कोथानुर के अजीत वर्गीज मथाई, यादव लेआउट के मीका मार्क (जिन्हें बेंगलुरु एयरपोर्ट पर 24 विदेशी डेबिट कार्ड के साथ पकड़ा गया था), मैसूरु के सुप्रीम जॉय, छत्तीसगढ़ के वर्गीज चाको और असम के बबलू कुर्मी शामिल हैं। FIR में इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को कथित तौर पर नष्ट करने का भी ज़िक्र है; इसमें खास तौर पर यह दावा किया गया है कि वित्तीय ट्रैकिंग को छिपाने के लिए आरोपियों में से एक ने बैकएंड डेटाबेस अकाउंट डिलीट कर दिया था।
