June 24, 2026
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अजय शास्त्री (वरिष्ठ पत्रकार व संपादक)

बीसीआर न्यूज़/लखनऊ: राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में सोमवार दोपहर एक बहुमंजिला कमर्शियल कॉम्प्लेक्स में भड़की भीषण आग ने तांडव मचाया। इस दिल दहला देने वाले हादसे में अब तक 18 लोगों (जिनमें अधिकांश छात्र हैं) की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं। इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर स्थित एक पेट शॉप (Pet Shop) से शुरू हुई आग ने देखते ही देखते पूरी बिल्डिंग को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे के वक्त ऊपरी मंजिलों पर चल रहे कोचिंग सेंटर, लाइब्रेरी और गेमिंग जोन में भारी संख्या में छात्र और बच्चे मौजूद थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। पीएम मोदी ने मृतकों के परिजनों और घायलों के लिए आर्थिक मदद का एलान किया है, वहीं सीएम योगी आदित्यनाथ अलीगढ़ के अपने सभी कार्यक्रम रद्द कर तुरंत लखनऊ लौटे और दोषियों के खिलाफ बेहद सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों और बिल्डिंग के कर्मचारियों के मुताबिक, हादसा सोमवार दोपहर करीब 3 बजे हुआ। ‘हेड हॉपर गेमिंग जोन’ के एक कर्मचारी पंकज कुमार ने बताया कि सबसे पहले ग्राउंड फ्लोर पर स्थित पेट शॉप के बिजली के बिल बोर्ड में शॉर्ट सर्किट हुआ।

चिंगारी ने चंद सेकेंडों में ही पेट शॉप के भीतर रखे सामान को पकड़ लिया। चूंकि बिल्डिंग में वेंटिलेशन (हवा की निकासी) की सही व्यवस्था नहीं थी और भारी मात्रा में फॉल्स सीलिंग व प्लास्टिक का इस्तेमाल किया गया था, इसलिए आग ने बेहद आक्रामक रूप ले लिया। महज 30 मिनट के भीतर आग ग्राउंड फ्लोर से होते हुए दूसरे और तीसरे तल तक जा पहुंची। पूरी इमारत काले और जहरीले धुएं के गुबार से घिर गई, जिससे अंदर मौजूद लोगों को भागने का रास्ता तक नहीं मिला। हादसे का मंजर इतना खौफनाक था कि जब तीसरी मंजिल पर स्थित कोचिंग सेंटर और लाइब्रेरी के कमरों में धुआं भरने लगा, तो दम घुटने से बेहाल बच्चे अपनी जान बचाने के लिए खिड़कियों से नीचे कूदने लगे। इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में बच्चों की चीख-पुकार और बेबसी साफ देखी जा सकती है।

घटनास्थल पर मौजूद राहत एवं बचाव दल ने तुरंत मोर्चा संभाला। स्थानीय लोगों की मदद से प्रशासन ने जेसीबी (JCB) और कटर मशीनों के जरिए बिल्डिंग के पीछे की पक्की दीवार को तोड़ा। इस रास्ते से दर्जनों छात्रों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। हालांकि, तब तक 18 लोग दम घुटने और बुरी तरह झुलसने के कारण दम तोड़ चुके थे। हादसे में अपनों को खोने वाले परिवारों में कोहराम मचा है। गेमिंग जोन में काम करने वाले भुवन कुमार ने रोते हुए बताया कि इस आगजनी में उनके चचेरे भाई आदित्य की जान चली गई। भुवन ने प्रशासन की मुस्तैदी पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा, आग लगने के महज एक घंटे के भीतर सब कुछ जलकर खाक हो गया। दमकल विभाग को तुरंत सूचना दी गई थी, लेकिन फायर ब्रिगेड की गाड़ियां घटना के करीब एक घंटे बाद मौके पर पहुंचीं। अगर वे समय पर आ जाते, तो कई जानें बचाई जा सकती थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना को अत्यंत पीड़ादायक बताते हुए मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा जारी बयान के अनुसार, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से प्रत्येक मृतक के परिजनों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को अलीगढ़ में 462 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रम में मौजूद थे। जैसे ही उन्हें लखनऊ के इस भीषण अग्निकांड की सूचना मिली, उन्होंने अपने आगे के सभी कार्यक्रम तुरंत निरस्त कर दिए और लखनऊ के लिए रवाना हो गए। सीएम योगी ने इस घटना को “हृदय विदारक” बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्णा और अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को खुद घटनास्थल का मुआयना करने और इस महालापरवाही पर एक विस्तृत रिपोर्ट सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपने का आदेश दिया है।

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और जिला मजिस्ट्रेट (DM) भी मौके पर रहकर राहत कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती ने यूपी की राजधानी लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में हुई अग्निकांड में अनेक लोगों की मौत तथा कई लोगों के घायल होने की घटना अति-दुखद। इस प्रकार की जानलेवा घटनाएं दिल को दहलाने वाली होती हैं और कितने ही परिवारों की उम्मीदों को बिखेर देती हैं। ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए सबको मिलकर सही से काम करने की जरूरत है। सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप से काम नहीं चलेगा।” अखिलेश यादव (सपा अध्यक्ष) ने लखनऊ के कोचिंग सेंटर में जान गंवाने वालों के प्रति हमारी विनम्र श्रद्धांजलि। जिन्होंने अपनों को खोया है, उन शोक संतप्त परिवारों के प्रति हमारी गहरी संवेदनाएं हैं।

सरकार घायलों के लिए सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा सुनिश्चित करे। यह एक बेहद दुखद घटना है और इसके पीछे के कारणों की पूरी ईमानदारी से जांच होनी चाहिए। बच्चे किसी के घर के भी हो सकते थे। भविष्य में ऐसे हादसों से बचा जा सके, यही हम सबकी कोशिश होनी चाहिए। लखनऊ का यह अग्निकांड कोई पहला हादसा नहीं है। इससे पहले भी देश के कई हिस्सों (जैसे सूरत और दिल्ली) में कोचिंग सेंटरों में ऐसे हादसे हो चुके हैं।

एलडीए (लखनऊ विकास प्राधिकरण) और फायर विभाग पर सीधे सवाल उठते हैं कि क्या इस कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के पास ‘फायर नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (Fire NOC) था?, जिस इमारत में हजारों छात्र रोज पढ़ने आते थे, वहां आपातकालीन निकास (Emergency Exit) क्यों नहीं था?, रिहायशी और कमर्शियल मिक्स इलाकों में चल रहे ऐसे डेथ-ट्रैप्स पर प्रशासन पहले से आंखें मूंदकर क्यों बैठा रहता है?, जब तक इन अवैध और नियमों को ताक पर रखकर चल रहे कमर्शियल सेंटरों पर बुलडोजर नहीं चलेगा और भ्रष्ट अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं होगी, मासूम बच्चे ऐसे ही लापरवाही की आग में होम होते रहेंगे।

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