July 18, 2026
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अजय शास्त्री (वरिष्ठ पत्रकार)

बीसीआर न्यूज़/नई दिल्ली: अगर आपके पास कोई नया आइडिया है और आप अपना स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं, तो दिल्ली सरकार की नई स्टार्टअप और इन्क्यूबेशन नीति आपके काम आ सकती है। दरअसल, रेखा गुप्ता सरकार ने इस नीति को मंजूरी दे दी है। इसके तहत अगले 5 साल में 400 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश सरकार का कहना है कि इसका मकसद दिल्ली को इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप का बड़ा सेंटर बनाना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नीति सिर्फ स्टार्टअप शुरू कराने तक सीमित नहीं है। सरकार चाहती है कि स्टूडेंट्स, रिसर्चर्स, टीचर्स, पूर्व छात्रों और नए उद्यमियों के पास अगर कोई अच्छा विचार है तो उसे आगे बढ़ाने के लिए उन्हें संसाधनों, मार्गदर्शन और आर्थिक सहायता की कमी न हो। इस पॉलिसी के बाद दिल्ली के युवा, अब नौकरी खोजने वाले नहीं, नौकरी देने वाले बनेंगे।

11 स्टेट यूनिवर्सिटी, 13 सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेजों में शुरू होगी पॉलिसी

यह पॉलिसी शुरुआत में 11 स्टेट यूनिवर्सिटी, 13 सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेजों, पॉलिटेक्निक, आईटीआई में लागू होगी, जबकि सरकारी स्कूल के स्टूडेंट्स इन संस्थानों में इस नीति का लाभ उठा सकते हैं। कामयाब होने पर स्टूडेंट्स को वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।

इस नीति के तहत सरकार की ओर से तय मानकों को पूरा करने वाले संस्थानों को इन्क्यूबेशन सेंटर बनाने और उन्हें मजबूत करने के लिए एकमुश्त वित्तीय सहायता दी जाएगी। इसके संचालन, मॅटरिंग, नेटवर्किंग, इनोवेशन और स्टार्टअप इकोसिस्टम को विकसित करने के लिए हर साल भी आर्थिक मदद उपलब्ध कराई जाएगी।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि यह नीति दिल्ली में इनोवेशन की संस्कृति को मजबूत करने, रोजगार के नए अवसर पैदा करने और राजधानी को देश के प्रमुख इनोवेशन और स्टार्टअप सहायता केंद्र रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगी। इन्क्यूबेशन सेंटर से जुड़े स्टार्टअप्स को फेज वाइज डिवेलपमेंट के आधार पर वित्तीय मदद मिलेगी। यह सहायता प्रोटोटाइप तैयार करने, प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट विकसित करने, प्रोडक्ट तैयार करने, बाजार में उसकी उपयोगिता तक दी जाएगी।

इस पॉलिसी के तहत हर साल ‘दिल्ली स्टार्टअप युवा महोत्सव’ का भी आयोजन किया जाएगा। यहां नए विचारों का प्रदर्शन होगा और नई साझेदारियां विकसित करने का अवसर मिलेगा। नीति के क्रियान्वयन की निगरानी स्टेट इन्क्यूबेशन पॉलिसी मॉनिटरिंग कमिटी करेगी। इसमें सरकार, शिक्षण संस्थानों, उद्योग जगत और स्टार्टअप इकोसिस्टम के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

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