अजय शास्त्री (वरिष्ठ पत्रकार व संपादक)
बीसीआर न्यूज़/नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर की रफ्तार आज थोड़ी थमी हुई नजर आ सकती है. सुबह ऑफिस निकलने वाले लोग हों, एयरपोर्ट जाने वाले यात्री हों या बच्चों को स्कूल छोड़ने वाले परिवार, हर किसी के लिए आज का दिन मुश्किल भरा हो सकता है. वजह है टैक्सी, ऑटो और कमर्शियल ट्रांसपोर्ट यूनियनों की तीन दिन की हड़ताल. महंगे पेट्रोल-डीजल और लगातार बढ़ते ऑपरेशन खर्च ने ड्राइवरों का गुस्सा सड़क पर ला दिया है. यूनियनों का कहना है कि पिछले कई सालों से किराए में बड़ा बदलाव नहीं हुआ, जबकि ईंधन, इंश्योरेंस, परमिट और मेंटेनेंस का खर्च लगातार बढ़ता गया. ऐसे में ड्राइवरों की कमाई घटती जा रही है. दिल्ली की सड़कों पर हर दिन लाखों लोग ऑटो और कैब पर निर्भर रहते हैं. लेकिन आज कई जगह लंबा इंतजार, महंगे किराए और कम गाड़ियां देखने को मिल सकती हैं. यही नहीं, इस हड़ताल का असर सिर्फ यात्रियों तक सीमित नहीं रहेगा. सब्जियों, फलों और जरूरी सामान की सप्लाई पर भी दबाव बढ़ सकता है.
दिल्ली-एनसीआर में ट्रांसपोर्ट यूनियनों ने 21 से 23 मई तक विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है. चालक शक्ति यूनियन समेत कई संगठनों का कहना है कि सरकार को अब किराया बढ़ाने और कमर्शियल वाहनों पर लगने वाले अतिरिक्त शुल्कों पर राहत देनी चाहिए. यूनियन नेताओं के मुताबिक ऐप बेस्ड कैब कंपनियों की कमीशन नीति ने भी ड्राइवरों की कमाई पर असर डाला है. ड्राइवरों का आरोप है कि बढ़ती महंगाई के बीच परिवार चलाना मुश्किल हो गया है. दूसरी तरफ, दिल्ली सरकार और प्रशासन की ओर से अभी तक कोई बड़ा वैकल्पिक प्लान घोषित नहीं किया गया है. ऐसे में मेट्रो और डीटीसी बसों पर दबाव बढ़ने की संभावना है. नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद और फरीदाबाद आने-जाने वाले लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ सकती है.
हड़ताल से क्या-क्या प्रभावित होगा?
- दिल्ली-एनसीआर में चलने वाली टैक्सी, ऐप बेस्ड कैब, कुछ ऑटो सेवाएं और माल ढुलाई से जुड़े वाहन इस हड़ताल से प्रभावित हो सकते हैं. यूनियनों ने प्रतीकात्मक चक्का जाम का भी ऐलान किया है. अगर बड़ी संख्या में वाहन सड़कों से गायब रहते हैं तो रोजमर्रा की सप्लाई चेन पर असर पड़ सकता है.
- हड़ताल के पीछे सबसे बड़ा मुद्दा पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें हैं. यूनियन प्रतिनिधियों का कहना है कि पिछले एक दशक में ईंधन और वाहन संचालन लागत कई गुना बढ़ चुकी है लेकिन किराए में उसी हिसाब से बदलाव नहीं हुआ. उनका दावा है कि कई ड्राइवर कर्ज और आर्थिक दबाव में काम कर रहे हैं.
- ट्रांसपोर्ट यूनियनों ने दिल्ली के उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है. ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने कहा है कि अगर सरकार ने जल्द समाधान नहीं निकाला तो आंदोलन और तेज किया जा सकता है. 23 मई को दिल्ली सचिवालय के पास प्रदर्शन की भी तैयारी है.
यात्रियों को सबसे ज्यादा कहां होगी परेशानी?
दिल्ली एयरपोर्ट, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन, आनंद विहार, सराय काले खां और गुरुग्राम-नोएडा रूट पर सबसे ज्यादा असर देखने को मिल सकता है. ऑफिस टाइम में कैब की कमी और लंबा वेटिंग टाइम यात्रियों की परेशानी बढ़ा सकता है. कई लोग पहले से मेट्रो और बसों का सहारा लेने लगे हैं.
सब्जियों और जरूरी सामान की सप्लाई पर असर
हड़ताल का असर सिर्फ यात्री परिवहन तक सीमित नहीं रहेगा. माल ढुलाई करने वाले ट्रांसपोर्टर भी विरोध में शामिल हो रहे हैं. इससे दिल्ली की मंडियों में सब्जियां, फल और किराना सामान पहुंचने में देरी हो सकती है. खासकर पड़ोसी राज्यों से आने वाली सप्लाई प्रभावित होने का खतरा है.
सरकार पर बढ़ रहा दबाव
यूनियनों का कहना है कि अगर मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन और बड़ा हो सकता है. सरकार फिलहाल स्थिति पर नजर बनाए हुए है लेकिन अभी तक किसी बड़े राहत पैकेज या किराया संशोधन का ऐलान नहीं हुआ है. इससे ड्राइवरों और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है.
दिल्ली-एनसीआर में यह हड़ताल कितने दिन चलेगी?
ट्रांसपोर्ट यूनियनों ने 21 मई से 23 मई तक तीन दिन की हड़ताल का ऐलान किया है. इस दौरान टैक्सी, ऑटो और कुछ कमर्शियल वाहन सेवाएं प्रभावित रह सकती हैं. हालांकि सभी यूनियनों ने भागीदारी की पुष्टि नहीं की है, इसलिए असर अलग-अलग इलाकों में अलग हो सकता है.
हड़ताल की सबसे बड़ी वजह क्या है?
यूनियनों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. इसके अलावा वाहन मेंटेनेंस, परमिट, इंश्योरेंस और टैक्स का खर्च भी काफी बढ़ चुका है. ड्राइवरों का आरोप है कि किराया लंबे समय से नहीं बढ़ा, जिससे उनकी कमाई घटती जा रही है.
आम लोगों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
यात्रियों को पहले से यात्रा की योजना बनानी चाहिए. ऑफिस जाने वाले लोग मेट्रो और बस का विकल्प चुन सकते हैं. एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन जाने वाले यात्रियों को अतिरिक्त समय लेकर निकलने की सलाह दी गई है. ऐप बेस्ड कैब की उपलब्धता कम हो सकती है और किराए बढ़ सकते हैं.
Delhi-NCR Transport Strike Live: सब्जियों और जरूरी सामान की सप्लाई पर भी असर
Delhi Transport Strike Live: सिर्फ यात्री वाहन ही नहीं, बल्कि माल ढुलाई करने वाले ट्रांसपोर्टरों ने भी 21 से 23 मई तक सांकेतिक चक्का जाम का ऐलान किया है. इससे दिल्ली-एनसीआर की मंडियों में सब्जियां, फल और रोजमर्रा का सामान पहुंचने में देरी हो सकती है. ट्रांसपोर्ट कंपनियों का कहना है कि पर्यावरण शुल्क और कमर्शियल वाहनों पर बढ़ते नियमों ने उनका खर्च और बढ़ा दिया है. अगर हड़ताल लंबी चली तो बाजार में असर साफ दिखाई दे सकता है.
Delhi Transport Strike Live: टैक्सी-ऑटो की कमी से बढ़ सकती है लोगों की मुश्किल
Delhi-NCR Transport Strike Live: हड़ताल के चलते ऐप बेस्ड कैब, लोकल टैक्सी और कुछ ऑटो सेवाओं पर असर देखने को मिल सकता है. सुबह और शाम के पीक आवर में लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ सकता है. दिल्ली मेट्रो और डीटीसी बसों में भी भीड़ बढ़ने की आशंका है. गुरुग्राम, नोएडा, गाजियाबाद और फरीदाबाद आने-जाने वाले यात्रियों को सबसे ज्यादा परेशानी हो सकती है. यूनियन नेताओं का कहना है कि ‘लगातार बढ़ते पेट्रोल-डीजल की कीमतों ने ड्राइवरों की कमर तोड़ दी है.’
Delhi-NCR Transport Strike Live: महंगे ईंधन पर ट्रांसपोर्टरों का गुस्सा, दिल्ली-NCR में 3 दिन की बड़ी हड़ताल
Delhi Transport Strike Live: दिल्ली-एनसीआर में आज से टैक्सी, ऑटो और कमर्शियल वाहनों की तीन दिन की हड़ताल शुरू हो गई है. बढ़ती पेट्रोल-डीजल कीमतों और किराया बढ़ाने की मांग को लेकर कई ट्रांसपोर्ट यूनियन सड़क पर उतर आई हैं. चालाक शक्ति यूनियन समेत कई संगठनों का कहना है कि पिछले कई सालों से किराया नहीं बढ़ा, जबकि ईंधन, परमिट, बीमा और मेंटेनेंस का खर्च लगातार बढ़ता गया. इसका असर सीधे दिल्लीवालों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ सकता है. ऑफिस जाने वाले लोगों से लेकर एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन जाने वाले यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ सकती है.
