अजय शास्त्री (वरिष्ठ पत्रकार व संपादक)
बीसीआर न्यूज़/नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली का लोक निर्माण विभाग (PWD) सिविल लाइंस इलाके के शामनाथ मार्ग पर ‘मनहूस’ माने जाने वाले 33 नंबर बंगले में एक ‘ एकीकृत नियंत्रण एवं कमान केंद्र’ बनाने की योजना बना रहा है। सालों से खाली पड़ी इस दो मंजिला इमारत को अधिकारियों के बीच ‘मनहूस’ माना जाता है और इसमें रहने आने वाले लोग आने से पहले हिचकिचाते रहे हैं, इसलिए अब इस पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सरकार ने बुलडोज़र चलाने की तैयारी कर ली है।
आपको बता दें कि उस जगह पर एकीकृत नियंत्रण व कमान केंद्र का नक्शा और दूसरे पहलू तैयार करने के लिए एक परमार्श कंपनी की सेवा लेने के लिए निविदा जारी की गई है। काम मिलने की तारीख से दो महीने के अंदर परियोजना रिपोर्ट जमा करनी होगी।’ मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस साल के बजट में एक ऐसे केंद्र की घोषणा की है, जिसे शहर में किसी भी आपदा के प्रबंधन के लिए केंद्रीय नियंत्रण कक्ष के तौर पर काम करने के लिए डिजाइन किया जाएगा।
योजना के अनुसार परियोजना कुल 17 लाख रुपये की लागत में पूरी की जाएगी और परामर्शदाता एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करेगी जिसमें कुल लागत का अनुमान, रखरखाव का खर्च और मानवबल की जरूरत जैसी बातें शामिल होंगी।
ज्ञात हो कि इस बंगले में कभी दिल्ली के पहले मुख्यमंत्री चौधरी ब्रह्म प्रकाश रहते थे। वह 1952 में पद संभालने के बाद यहां रहने आए थे, लेकिन 1955 में एक कथित घोटाले के कारण अपना कार्यकाल पूरा करने से पहले ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया था।
वर्ष 1993 में मुख्यमंत्री बनने के बाद मदन लाल खुराना को यह बंगला आवंटित किया गया था। लेकिन वह इस बंगले में रहने नहीं आए, बल्कि इसमें अपना कार्यालय बनाया और कार्यकाल पूरा करने से पहले ही 1996 में इस्तीफा दे दिया।
दिल्ली सरकार में पूर्व उद्योग मंत्री दीप चंद बंधु को यह बंगला आवंटित किया गया था। वर्ष 2003 में अपने कार्यकाल के दौरान उनका निधन हो गया। वर्ष 2013 में इस बंगले को तत्कालीन प्रधान सचिव (ऊर्जा) शक्ति सिन्हा को आवंटित किया गया , लेकिन चार महीने के भीतर ही उन्होंने इसे छोड़ दिया।
खबरों के मुताबिक, पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित मथुरा रोड पर एक अपेक्षाकृत बहुत छोटे बंगले में जाना पसंद किया। यह बंगला 1920 के दशक का है, जब अंग्रेजों ने वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के रहने के लिए ‘सिविल लाइन्स’ इलाका बसाया था। बड़े भूखंड पर बनी इस संपत्ति में चार बैडरूम, कई बैठक कक्ष, एक बड़ा दीवान खाना, फव्वारे, सामने एक लॉन, एक आउट हाउस और सात स्टाफ क्वार्टर हैं।
