अजय शास्त्री (संपादक)
बीसीआर न्यूज़ (नई दिल्ली): हाल ही में दिल्ली नगर निगम द्वारा दिल्ली में आवासीय परिसरों में गैर-आवासीय गतिविधियों और कमर्शियल उद्देश्यों के लिए दुरुपयोग की पहचान के संबंध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का अनुपालन।
मुख्य बिंदु:
MCD कमिश्नर (संजीव खिरवार) द्वारा सभी ज़ोनल उपायुक्तों को आदेश जारी किया गया है। कि उन सभी आवासीय क्षेत्रों/परिसरों की पहचान करने के लिए एक समय-सीमा के भीतर सर्वेक्षण करना जरुरी है, जिनका उपयोग गैर-आवासीय उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है।
जारी निर्देश:
- अपने ज़ोन में एक विस्तृत क्षेत्र सर्वेक्षण और सत्यापन करें।
- उन सभी मामलों की एक व्यापक ज़ोन-वार सूची तैयार करें, जहाँ आवासीय परिसरों का दुरुपयोग गैर-आवासीय उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है।
- यह सुनिश्चित करें कि डेटा सटीक, सत्यापित हो और सर्वोच्च न्यायालय में हलफनामा दाखिल करने के लिए आवश्यक अभिलेखों (records) द्वारा समर्थित हो।
- किसी भी चूक/गलत रिपोर्टिंग के लिए उचित स्तरों पर जवाबदेही तय करें।
कवरेज में शामिल हैं:
- सभी आवासीय कॉलोनियां, जिनमें अनधिकृत/नियमित और अनुमोदित कॉलोनियां भी शामिल हैं।
- ग्रुप हाउसिंग सोसायटी और प्लॉटेड डेवलपमेंट (भूखंड विकास) क्षेत्र।
- MCD के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र, जिनमें ऐसे ‘द्वीप’ (islands) या पॉकेट भी शामिल हैं जो तकनीकी रूप से प्रशासनिक सीमाओं के बाहर हैं, लेकिन MCD क्षेत्रों से घिरे हुए हैं।
समय-सीमा:
संकलित रिपोर्ट 07 दिनों के भीतर अतिरिक्त कमिश्नर (इंजीनियरिंग) तक पहुँच जानी चाहिए, ताकि हलफनामा दाखिल करने के लिए अधोहस्ताक्षरी द्वारा इसे व्यक्तिगत रूप से सत्यापित किया जा सके।
नोट: सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार, किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी को गंभीरता से लिया जाएगा।
अतिक्रमण भी हटाया जाये:
MCD कमिश्नर (संजीव खिरवार) द्वारा सभी ज़ोनल उपायुक्तों को एक आदेश और जारी करना चाहिए ताकि रिहायशी कॉलोनी में हो रहे अतिक्रमण को भी रोका जा सके क्योंकि अतिक्रमण के चलते कॉलोनियों में रास्ते या तो बंद कर दिए है या इतने छोटे कर दिए गए हैं कि पैदल निकलना भी मुश्किल हो जाता हैं। इस मुद्दे पर MCD कमिश्नर (संजीव खिरवार) को गंभीरता से लेते हुए तुरंत कार्यवाही करनी चाहिए।
