Ajay Shastri (Editor & Publisher)
LPG Shortage Delhi : दिल्ली में एलपीजी सिलेंडर की कमी ने खाने-पीने के कारोबार को बड़ा झटका दिया है। पिछले दो दिनों से राजधानी के कई रेस्टोरेंट और छोटे ढाबों में किचन पूरी तरह ठप पड़ गए हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि कई जगहों पर रेस्टोरेंट मालिकों को मजबूर होकर दुकानें अस्थायी रूप से बंद करनी पड़ रही हैं। कारोबारियों का कहना है कि गैस की सप्लाई रुकने से न सिर्फ उनका बिजनेस प्रभावित हो रहा है बल्कि उन कर्मचारियों की रोजी-रोटी भी खतरे में पड़ गई है जो इन किचन पर निर्भर हैं।
दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में कई कैफे और छोटे रेस्टोरेंट या तो बंद हैं या सीमित मेन्यू के साथ काम चला रहे हैं। कारोबारी बताते हैं कि गैस सिलेंडर की कमी की वजह से कई किचन पूरी तरह रुक गए हैं और जो सिलेंडर बचे हैं, उन्हें बचाकर इस्तेमाल किया जा रहा है।
राजधानी के कारोबारी इलाकों में भी इस संकट का असर साफ दिखाई दे रहा है। करोल बाग स्थित Boheme Cafe Bar और पहाड़गंज के मशहूर Kashmir Chur Chur Naan ने भी गैस की कमी के कारण अपने किचन अस्थायी रूप से बंद कर दिए हैं। इसके अलावा Tadka Rani के कई आउटलेट्स भी फिलहाल बंद पड़े हैं। Boheme Cafe Bar के एक प्रतिनिधि ने बताया कि गैस की कमी के कारण उनका रेस्टोरेंट सेक्शन बंद करना पड़ा है और फिलहाल सिर्फ बार ही चल रहा है। उनका कहना है कि यह समस्या सिर्फ कारोबार तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे कर्मचारियों की रोजी-रोटी पर भी असर पड़ रहा है। कई कर्मचारी दूसरे राज्यों से आकर यहां काम करते हैं और उनका पूरा गुजारा इसी नौकरी पर निर्भर है।
24 घंटे चलने वाले रेस्टोरेंट पर सबसे ज्यादा असर (24×7 Restaurant Loss)
कई ऐसे रेस्टोरेंट जो 24 घंटे चलते हैं, उन्हें इस संकट से सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है। Tadka Rani के प्रतिनिधि रवि सिंह का कहना है कि उनके किचन में पिछले लगभग दो दिनों से गैस की सप्लाई नहीं पहुंची है। उनके मुताबिक जैसे ही किचन बंद होता है, नुकसान तुरंत शुरू हो जाता है। उन्होंने बताया कि हर किचन को करीब दो लाख रुपये तक का नुकसान हो रहा है। प्रत्येक किचन में करीब 17 से 18 कर्मचारी काम करते हैं और इस स्थिति ने कर्मचारियों के बीच भी तनाव बढ़ा दिया है क्योंकि सभी को अपनी नौकरी और आय की चिंता सताने लगी है।
छोटे रेस्टोरेंट और ढाबों की हालत ज्यादा खराब (Small Eateries Crisis)
दिल्ली के छोटे ढाबे और स्ट्रीट फूड आउटलेट्स इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। शाहदरा के एक छोटे रेस्टोरेंट मालिक ने बताया कि गैस खत्म होने के बाद उन्हें मजबूर होकर अपना आउटलेट कुछ दिनों के लिए बंद करना पड़ा। उन्होंने कहा कि उनका पूरा कारोबार रोज चलने वाले किचन पर निर्भर है। महीने की सैलरी और खाने का सामान पहले ही खरीदा जा चुका था, लेकिन गैस खत्म होने के बाद खाना बनाना संभव नहीं रहा। उन्होंने बताया कि उनके यहां तंदूर और फास्ट फूड सेक्शन चलता है, जिसमें लगातार आग जलती रहनी जरूरी होती है। गैस की कमी के कारण अब यह सब बंद पड़ा है।
स्ट्रीट फूड वेंडर्स भी संकट में (Street Food Vendors Crisis)
दिल्ली की फूड इकॉनमी में स्ट्रीट फूड वेंडर्स की बड़ी भूमिका है, लेकिन एलपीजी की कमी ने उन्हें भी मुश्किल में डाल दिया है। छोटे सिलेंडर पर चलने वाले ये ठेले अब महंगे सिलेंडर की वजह से परेशान हैं। Indian Hawkers Alliance से जुड़े संदीप ने बताया कि शहर भर के करीब सौ से ज्यादा वेंडर्स के साथ बैठक हुई, जिसमें लगभग सभी ने गैस की समस्या बताई। उनका कहना है कि छोटे सिलेंडर की कीमत अब करीब 4000 रुपये तक पहुंच गई है, जिससे रोज का कारोबार चलाना बेहद मुश्किल हो गया है। उत्तम नगर में हालात और खराब (Uttam Nagar LPG Crisis) दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के उत्तम इलाके में स्थिति और भी गंभीर हो गई है। यहां हाल ही में एक हत्या के बाद विरोध प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के चलते कई दिन तक बाजार बंद रहे थे। होलिका दहन के दौरान हुए विवाद में 26 वर्षीय तरुण की हत्या के बाद इलाके में भारी पुलिस तैनाती की गई थी और कई दुकानें बंद कर दी गई थीं। जब दुकानदार दोबारा कारोबार शुरू करने की तैयारी कर रहे थे, तभी गैस सिलेंडर की कमी ने नई मुश्किल खड़ी कर दी।
ब्लैक मार्केट में महंगे सिलेंडर (Black Market LPG Price)
उत्तम नगर के कई रेस्टोरेंट मालिकों का कहना है कि नियमित बुकिंग से सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं, इसलिए उन्हें ब्लैक मार्केट से महंगे दामों पर सिलेंडर खरीदने पड़ रहे हैं। रेस्टोरेंट मालिक मोहम्मद शाकी ने बताया कि उनके रेस्टोरेंट को रोज कम से कम तीन सिलेंडर की जरूरत होती है। इलाके में करीब 35 से 40 रेस्टोरेंट हैं और लगभग सभी इस संकट से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई कर्मचारी तो नुकसान से बचने के लिए अपने गांव लौट गए हैं।
बिरयानी से लेकर सब्जी तक सीमित मेन्यू (Limited Restaurant Menu)
एक अन्य रेस्टोरेंट मालिक मोहम्मद नासिर का कहना है कि अगर हालात तीन दिन और ऐसे ही रहे तो उन्हें अपना होटल बंद करना पड़ सकता है। उनके यहां करीब 20 से 22 कर्मचारी काम करते हैं, लेकिन फिलहाल सभी खाली बैठे हैं। उन्होंने बताया कि पहले जहां चार से आठ तरह की सब्जियां बनती थीं, अब सिर्फ एक ही डिश बन रही है। बिरयानी बनाने के लिए आमतौर पर चूल्हा लगातार जलता रहता है, लेकिन अब गैस बचाने के लिए जरूरत पड़ने पर ही चूल्हा जलाया जा रहा है।
पश्चिम एशिया तनाव का असर (West Asia Conflict Impact)
गैस की कमी ऐसे समय सामने आई है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण ऊर्जा सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ी हुई हैं। सरकार ने हाल ही में घरेलू गैस के इस्तेमाल की प्राथमिकताएं तय करते हुए एलपीजी उत्पादन, सीएनजी और पाइप गैस सेक्टर को प्राथमिकता देने का फैसला किया है। नई नीति के तहत पहले इन क्षेत्रों की जरूरतें पूरी की जाएंगी और उसके बाद ही गैस अन्य उद्योगों को दी जाएगी।
कारोबारियों को सप्लाई सामान्य होने का इंतजार (Delhi Food Industry Concern)
रेस्टोरेंट मालिकों और स्ट्रीट फूड वेंडर्स का कहना है कि अगर जल्द गैस की नियमित सप्लाई शुरू नहीं हुई तो दिल्ली के कई छोटे रेस्टोरेंट बंद होने की कगार पर पहुंच सकते हैं। फिलहाल कारोबारियों की उम्मीद इसी पर टिकी है कि जल्द ही सिलेंडर की सप्लाई सामान्य होगी, ताकि किचन फिर से चल सकें और हजारों लोगों की रोजी-रोटी दोबारा पटरी पर लौट सके।
