बीसीआर न्यूज़/वडोदरा, 21 नवंबर 2025 – वडोदरा शहर में एक बड़े अंतरराज्यीय धोखाधड़ी रैकेट का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक सहित कई राज्यों के लोगों को सोना सस्ते दाम पर देने और करोड़ों की बिजनेस लोन दिलाने के नाम पर भारी ठगी की गई। ताजा एफआईआर के अनुसार, ठगों ने कुल 4,92,50,000 रुपये (4.92 करोड़) पीड़ित से अलग-अलग तरीकों से वसूल लिए।
पीड़ित — मंजू आर. रवी , कर्नाटक निवासी — ने वडोदरा के जे.पी. रोड पुलिस स्टेशन में विस्तृत शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने मामला B.N.S.S. की धारा 316(2), 316(5), 318(4), 61(2), 204 सहित अन्य धाराओं के तहत दर्ज किया है।
कैसे शुरू हुई ठगी? मुंबई से वडोदरा, फिर 8 महीने तक चलता रहा जाल
मार्च 2025 में कर्नाटक के दावणगेरे में एक कार्यक्रम के दौरान पीड़ित की मुलाकात चिंतन नाम के व्यक्ति से हुई। उसने दावा किया कि गुजरात में उसके जानकार “सस्ते दाम पर सोना और कम ब्याज पर बड़ी लोन” दिलाते हैं।
इसके बाद पीड़ित और उसका मित्र मनोज, चिंतन व उसके साथी उमेश नायक के साथ पहले मुंबई और फिर वडोदरा लाए गए।
वडोदरा में, उन्हें विशाल विनोदभाई बारड़ और नयनाबेन महिडा नाम के व्यक्तियों से मिलवाया गया, जो खुद को “गोल्ड डीलर” बताते थे। उन्होंने बाजार भाव से 5–7% कम दाम पर सोना देने और बड़ी डील पर GST रिफंड का लालच दिया।
पीड़ित की पहली डील में उसे 100 ग्राम का सोने का बिस्किट भी दिया गया ताकि विश्वास बन सके।
लोन दिलाने का नया झांसा – 10 करोड़ की लोन
कुछ दिनों बाद विशाल बारड़ ने खुद को “बिजनेस लोन एजेंट” बताया और कहा कि वे पीड़ित को 10 करोड़ रुपये की बिजनेस लोन दिला देंगे।
इसके लिए “प्रोजेक्ट रिपोर्ट और बैंक मैनेजर की एडवांस कमीशन” के नाम पर 31 लाख रुपये मांगे गए।
पीड़ित ने 22 मई 2025 को अलग-अलग RTGS ट्रांजैक्शन में 18 लाख रुपये विशाल बारड़ के खाते में जमा किए।
इसके बाद 8 लाख रुपये और मांगे गए, जो पीड़ित ने नगद दिए।
मुख्य आरोपी राजवीर परिख उर्फ इच्छास अजमेरी का प्रवेश
इसके बाद सामने आया मुख्य मास्टरमाइंड — राजवीर परिख उर्फ इच्छास अजमेरी।
उसने अपनी कंपनी “राधे एंटरप्राइज इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट एंड फाइनेंस” के माध्यम से बड़े स्तर पर सस्ते सोने का व्यापार करने का दावा किया।
पीड़ित और उसके मित्रों को मीटिंग्स, होटेल्स, ऑफिस विज़िट्स के जरिए पूरी तरह विश्वास में लिया गया। राजवीर ने 1–3 किलो तक के सोने के बिस्किट दिखाकर भरोसा जीतने की कोशिश की।
देशभर से पैसा इकट्ठा कराया गया – 4.48 करोड़ रुपए वसूल
राजवीर ने पीड़ित से कहा कि “जितना ज्यादा पैसा दोगे, उतना ज्यादा सोना मिलेगा”।
पीड़ित ने अपने परिचितों और व्यावसायिक मित्रों से मिलाकर कुल 4,80,00,000 रुपये इकट्ठा किए।
उसमें शामिल कुछ प्रमुख व्यक्तियों ने निम्न राशि दी:
- 21 लाख
- 18 लाख
- 35 लाख
- 50 लाख
- 90 लाख
- 52 लाख
- 66 लाख
- 68 लाख
- 75 लाख
- आदि
इन पैसों का अधिकांश भुगतान कैश, वडोदरा में और PM अंगड़िया पेढी के माध्यम से कराया गया।
डीलिंग के दौरान, राजवीर ने पीड़ित को 10 बार में ~24 तोला सोना दिया, ताकि उन्हें लगे कि सब असली और वैध है।
लेकिन असल में यह 100% ठगी का जाल था ।
फर्जी पुलिस बनाकर सोना लूटने का ड्रामा – ‘स्विफ्ट डिज़ायर’ में 5 नकली पुलिसकर्मी
जुलाई 2025 में सबसे सनसनीखेज घटना सामने आई।
राजवीर ने पीड़ित को तीन किलो सोना दिखाकर कहा कि उसका आदमी “सुरक्षित जगह तक पहुंचा देगा”।
रात में वडोदरा से चलते वक्त नकली पुलिस वर्दी में 5 लोगों ने उनकी गाड़ी को ओवरटेक कर रोका, तलाशी ली और “चेकिंग” के बहाने सोने के बिस्किट लेकर गायब हो गए।
बाद में राजवीर ने कहा —
“पुलिस ने सोना पकड़ लिया है, मैं संभाल लूंगा। तुम बस घर जाओ।”
यह सब पहले से प्लान किया हुआ था।
कस्टम अधिकारी बनकर भी ठगा गया – 75 लाख की अलग ठगी
सितंबर 2025 में राजवीर ने पीड़ित को “कस्टम से रिलीज़ होना वाला 5 किलो सोना” दिलाने का झांसा दिया।
इसके लिए गणेश नाम के व्यक्ति को भेजा जिसने खुद को “कस्टम क्लियरेंस एजेंट” बताया।
उसने पीड़ित से 75 लाख रुपये लेकर “कस्टम ऑफिस में जा रहा हूं” कहा, फिर गायब हो गया और मोबाइल बंद कर दिया।
कुल ठगी की रकम: 4,92,50,000 रुपये
सभी घटनाओं को जोड़कर कुल ठगी की रकम —
₹49,250,000 (4.92 करोड़ रुपये)
बताई गई है।
एफआईआर में नामित कुल 19 आरोपी
एफआईआर में निम्न 19 लोगों के नाम/भूमिका स्पष्ट रूप से दर्ज हैं:
मुख्य आरोपी
1. विशाल विनोदभाई बारड़
2. नयनाबेन महिडा
3. राजवीर परिख उर्फ इच्छास अजमेरी
4. भरतभाई
5. राजभाई
6. सुलतानभाई
7. भावेशभाई
8. विरलभाई (डॉक्टर)
9. लालाभाई (ड्राइवर)
10. समीरभाई (ड्राइवर)
11. गणेश
12. हर्ष शर्मा
13. श्रीनिवासन – (खुद को ED अधिकारी बताता था)
14. 5 फर्जी पुलिसकर्मी – जिन्होंने गाड़ी रोकी
15. अन्य अज्ञात आरोपी
पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
- केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
- PSI मेघचंद्र डाइसिंहजी सोलंकी जांच अधिकारी नियुक्त हुए हैं।
- सभी मोबाइल नंबर, लेन-देन, होटल सीसीटीवी, अंगड़िया पेढी रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
- पुलिस का मानना है कि यह बहु-राज्यीय संगठित ठगी रैकेट है।
पीड़ित का आरोप
पीड़ित ने कहा:
“इन लोगों ने सोना और लोन दिलाने के नाम पर 8 महीने तक हमें घुमाया, झूठा भरोसा दिलाया, नकली पुलिस बुलाकर सोना छीन लिया। यह एक बड़े गिरोह का काम है। न्याय की मांग है।”
रिपोर्टर क्रुनाल पटेल के साथ ,
गुजरात ब्यूरो चीफ़ – रोहित पटेल ,
बीसीआर न्यूज़
