June 5, 2026
Bose

नई दिल्ली, न्यूज़ डेस्क

बीसीआर न्यूज़/नई दिल्ली: आजाद हिन्द फौज के स्थापना दिवस पर मंगलवार को नेताजी सुभाषचंद्र बोस के पोते चंद्र कुमार बोस ने सुभाषचंद्र बोस की अस्थियां जापान के रेंकोजी मंदिर से भारत लाए जाने की मांग की है. उन्होंने कहा कि 23 जनवरी 2026 से पहले अस्थियां भारत लाई जाएं और दिल्ली में आईएनए मेमोरियल बनाकर वहां स्थापित की जाएं. चंद्र कुमार बोस ने कहा कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस हमेशा स्वतंत्र भारत के आगमन की बात करते थे, इसलिए हम केंद्र सरकार से मांग करते हैं कि 23 जनवरी 2026 से पहले जापान के रेंकोजी मंदिर से नेताजी की अस्थियां भारत लाई जाएं. उन्होंने कहा कि 21 अक्टूबर 1943 को भारत की पहली स्वतंत्र सरकार ‘आजाद हिंद सरकार’ की स्थापना नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने की थी. वह अखंड भारत के पहले प्रधानमंत्री थे. उनके नेतृत्व में ही ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ युद्ध की घोषणा की गई थी. उनका कहना है कि अगर 21 अक्टूबर नहीं होता, तो 15 अगस्त भी नहीं होता. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि करीब 60 हजार सैनिकों ने म्यांमार से इंफाल तक पदयात्रा की थी और 14 अप्रैल 1944 को आजाद हिंद फौज के सैनिकों ने ब्रिटिश झंडा उतारकर भारत का तिरंगा फहराया था.

चंद्र कुमार बोस ने कहा कि आज तक आजाद हिंद फौज का सही इतिहास देशवासियों के सामने नहीं लाया गया है. इसके लिए न राज्य सरकार ने और न ही केंद्र सरकार ने कोई ठोस कदम उठाया है. स्कूल और कॉलेजों की पाठ्यपुस्तकों में भी सही इतिहास शामिल नहीं किया गया है. उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की है कि दोनों सरकारें मिलकर आजाद हिंद फौज और उनके वीर सैनिकों के योगदान को सामने लाएं, जिससे देशवासियों को भी उनके बारे में सही जानकारी मिल सके. वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया पोस्ट एक्स में लिखा कि आज आजाद हिंद सरकार के गठन की वर्षगांठ है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में भारत की आजादी के लिए वीरतापूर्वक लड़ने वाले आजाद हिंद फौज के वीर सैनिकों को मेरी भावभीनी श्रद्धांजलि.

जाने नेता जी की अस्थियां जापान कैसे पहुँची ?

जानकारी के अनुसार, एक विमान दुर्घटना में सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु हो गई थी. वे जापान की ओर जा रहे थे ताकि आजाद हिंद आंदोलन को आगे बढ़ा सकें, लेकिन विमान में आग लगने के कारण वे बुरी तरह जल गए और कुछ घंटों बाद उनका निधन हो गया. उनका शव ताइपेई के सैनिक अस्पताल में रखा गया वहीं पर उनका अंतिम संस्कार किया गया. उनका अंतिम संस्कार करने के बाद उनकी अस्थियां जापान के टोक्यो स्थित रेन्कोजी मंदिर में रख दी गईं. बता दें, ये एक बौद्ध मंदिर है.

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