बीसीआर न्यूज़/वडोदरा, गुजरात || हादसे के 4 दिन बाद भी पुलिस यह तय नहीं कर सकी है कि इस मामले में किस विभाग की जिम्मेदारी बनती है. अगर नाले को ढक दिया जाता या मोड़ पर पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए गए होते तो हादसा न होता.
दिल्ली के वसंत कुंज में सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी के 20 वर्षीय बेटे की दर्दनाक मौत को 4 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी है. हादसे की वजह खुले नाले, तीखे मोड़ और स्पीड ब्रेकर की कमी को माना जा रहा है. फिर भी पुलिस, डीडीए और ट्रैफिक विभाग के बीच जिम्मेदारी तय नहीं हो पाई है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस मौत का जिम्मेदार कौन है और एफआईआर दर्ज होने में देरी क्यों हो रही है.
यह हादसा वसंत कुंज साउथ थाना क्षेत्र के नांगल देवत रेड लाइट के पास शुक्रवार तड़के हुआ. अमेरिका में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे 20 वर्षीय यशवेंद्र अपनी महिला मित्र को उसके घर छोड़ने जा रहे थे. इसी दौरान करीब 130 डिग्री के तीखे मोड़ पर कार फिसल गई, पेड़ से टकराई और सड़क किनारे बने लगभग 12 फीट गहरे खुले नाले में जा गिरी.
कार पलटने के बाद यशवेंद्र ड्राइविंग सीट पर फंस गए और दम घुटने से उनकी मौत हो गई, जबकि उनकी महिला मित्र को पुलिस और स्थानीय लोगों ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया.
4 दिन बाद भी जिम्मेदारी तय नहीं
हादसे के 4 दिन बाद भी दिल्ली पुलिस यह तय नहीं कर सकी है कि इस मामले में किस विभाग की जिम्मेदारी बनती है. यही वजह है कि अब तक एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी है. पुलिस फिलहाल इंक्वेस्ट की कार्रवाई कर रही है और अब भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 194 के तहत मामला दर्ज करने की तैयारी में जुटी है.
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि हादसे वाली सड़क और खुला नाला डीडीए के अधीन है. डीडीए का कहना है कि उसने 23 मार्च को इस तीखे मोड़ पर स्पीड ब्रेकर बनाने के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस को पत्र भेजा था, लेकिन अनुमति नहीं मिलने के कारण निर्माण नहीं हो सका.
दूसरी ओर ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि स्पीड ब्रेकर बनाने की जिम्मेदारी संबंधित निर्माण एजेंसी की होती है. विभाग केवल तकनीकी सुझाव देता है. ट्रैफिक अधिकारियों के अनुसार जिस स्थान पर हादसा हुआ, वहां स्पीड ब्रेकर बनाने के लिए अनुमति मांगी ही नहीं गई थी, बल्कि कुछ दूरी आगे स्थित दूसरे स्थान के लिए प्रस्ताव भेजा गया था. दोनों विभागों के अलग-अलग दावों ने पूरे मामले को और उलझा दिया है.
स्थानीय लोगों ने उठाये विभागीय लापरवाही पर सवाल
नांगल देवत इलाके के स्थानीय ग्रामीणों और आरडब्ल्यूए सदस्यों का कहना है कि इस खुले नाले को लेकर कई बार संबंधित विभागों को शिकायत दी गई थी. लोगों ने नाले को ढकने और तीखे मोड़ पर सुरक्षा इंतजाम बढ़ाने की मांग भी उठाई थी, लेकिन उस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया.
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नाले को समय रहते ढक दिया जाता या मोड़ पर पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए गए होते, तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था.
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कैसे हुआ हादसा
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार हादसे के समय दो एसयूवी तेज रफ्तार में वहां से गुजर रही थीं. अचानक एक कार नियंत्रण खो बैठी और खुले नाले में पलट गई. नाले में उस समय दो से तीन फीट तक गंदा पानी, कचरा और मलबा भरा हुआ था.
पुलिस और स्थानीय लोगों ने कार में फंसी युवती को बाहर निकाल लिया, लेकिन यशवेंद्र ड्राइविंग सीट पर फंस गए थे. बाद में जेसीबी की मदद से कार को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी.
‘दोस्तों ने लगाई थी मदद की गुहार’
स्थानीय आरडब्ल्यूए अध्यक्ष प्रदीप सहरावत के मुताबिक हादसे के बाद मौके पर मौजूद यशवेंद्र के दोस्तों ने मदद की गुहार लगाते हुए कहा कि सीट बेल्ट फंस गई है और उनका दोस्त बाहर नहीं निकल पा रहा है. काफी कोशिशों के बावजूद समय रहते उन्हें बाहर नहीं निकाला जा सका और उनकी दम घुटने से मौत हो गई.
दोस्तों से मिलने छुट्टी लेकर भारत आए थे यशवेंद्र
परिजनों के अनुसार यशवेंद्र अमेरिका में पढ़ाई कर रहे थे और दोस्तों के साथ समय बिताने के लिए करीब 10 दिन पहले ही भारत आए थे. उनके पिता भारतीय सेना में वरिष्ठ अधिकारी हैं और वर्तमान में कोलकाता में तैनात हैं.
हादसे वाली सुबह यशवेंद्र अपनी महिला मित्र को उसके घर छोड़ने के लिए निकले थे. उनके एक अन्य मित्र अपनी कार से आगे-आगे चल रहे थे. नांगल देवत के तीखे मोड़ पर पहुंचते ही फिसलन और तेज रफ्तार के कारण कार अनियंत्रित होकर सीधे खुले नाले में जा गिरी.
पुलिस सूत्रों के मुताबिक शुरुआती जांच में हादसे के पीछे सड़क की स्थिति, तीखा मोड़ और वाहन का नियंत्रण खोना प्रमुख कारण माने जा रहे हैं. इसी वजह से किसी एक विभाग की सीधी जिम्मेदारी तय करने में पुलिस को कठिनाई आ रही है. जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
अब सबसे बड़ा सवाल, जवाबदेह कौन?
यशवेंद्र की मौत ने राजधानी में सड़क सुरक्षा, खुले नालों की देखरेख और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. एक ओर परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोग जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. ऐसे में अब नजरें इस बात पर होगी कि पुलिस एफआईआर कब दर्ज करती है और आखिर इस दर्दनाक हादसे की जवाबदेही किस पर तय होती है.
रिपोर्ट: रचना शर्मा
