बीसीआर न्यूज़/गुजरात: जब अपने ही लोग घर के दरवाजे बंद कर दें, तब सड़क ही इंसान का आखिरी सहारा बन जाती है। वडोदरा के बापोद क्षेत्र से ऐसी ही एक भावुक कर देने वाली घटना सामने आई है। पति के निधन के बाद परिवार से पूरी तरह अलग-थलग पड़ चुकी एक महिला पिछले तीन महीनों से शिव मंदिर के बाहर लगी बेंच पर रातें बिताने को मजबूर थी। आखिरकार 181 अभयम महिला हेल्पलाइन की टीम ने मानवता का परिचय देते हुए महिला को सुरक्षित आश्रय दिलाया और उसके जीवन में नई उम्मीद जगाई।
पति की मृत्यु के बाद महिला को ससुराल से घर छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया गया। मायके पक्ष ने भी उससे सभी संबंध तोड़ लिए। अपने दो बच्चों से भी अलग हो चुकी महिला पिछले तीन महीनों से मंदिर की बेंच पर जीवन गुजार रही थी। भूख लगने पर कोई भोजन दे देता तो खा लेती, अन्यथा भूखी रह जाती और रात होने पर खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर थी। ऐसे कठिन समय में 181 अभयम महिला हेल्पलाइन उसके लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आई।
181 अभयम टीम को सूचना मिली कि बापोद क्षेत्र में एक निराश्रित महिला को आश्रय की आवश्यकता है। सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंची। महिला ने बताया कि उसके पति का निधन हो चुका है और उनका मामला अदालत में लंबित है। उसके दो बच्चे फिलहाल अपने दादा-दादी के साथ रह रहे हैं, जबकि ससुराल वालों ने उसे अपनाने से इनकार कर दिया है।
महिला ने बताया कि उसके माता-पिता का भी निधन हो चुका है। उसका कोई भाई-बहन नहीं है, इसलिए मायके का भी कोई सहारा नहीं बचा। माता-पिता का घर उसके चाचा ने अपने कब्जे में ले लिया है और चाचा-चाची सहित अन्य रिश्तेदार भी उसे अपने घर रखने के लिए तैयार नहीं हैं। परिवार के सभी दरवाजे बंद हो जाके कारण वह पिछले तीन महीनों से एक शिव मंदिर के बाहर लगी बेंच पर रह रही थी। कोई भोजन दे देता तो खा लेती, अन्यथा भूखी रह जाती। स्थायी आवास और आजीविका का कोई साधन न होने के कारण वह असुरक्षित और भटकता हुआ जीवन जीने को विवश थी।
181 अभयम टीम ने महिला की काउंसलिंग की। इस दौरान महिला ने अपनी आपबीती सुनाई तो उसकी आंखों से आंसू छलक पड़े। टीम ने उसे सुरक्षित जीवन के लिए आश्रम में रहने की सलाह दी। महिला के सहमत होने पर टीम ने उसे ‘बागबान दीकरीनु घर’ आश्रम में सुरक्षित आश्रय दिलाया।
सिर पर छत और सुरक्षित वातावरण मिलने के बाद लंबे समय के पश्चात महिला के चेहरे पर मुस्कान लौट आई। 181 अभयम की इस मानवीय पहल ने एक बार फिर साबित कर दिया कि समय पर मिली मदद किसी के जीवन में नई शुरुआत का कारण बन सकती है।
रिपोर्ट: क्रुणाल पटेल | गुजरात ब्यूरो
