June 5, 2026
Mamta B

अजय शास्त्री (संपादक)

सार: ममता बनर्जी शुरू से ही जिद्दी स्वभाव की महिला रही हैं। बंगाल में वामपंथ के किले को ध्वस्त करना भी उनकी जिद और संकल्प का ही नतीजा था। लेकिन इस बार चुनाव में हार के बाद उन्होंने सीएम पद से इस्तीफा भी नहीं दिया और न ही सोशल मीडिया प्रोफाइल में एक्स सीएम लिखा।

बीसीआर न्यूज़/कोलकाता: ममता बनर्जी ने बंगाल चुनाव हारने के बाद सीएम पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था। जबकि यह परंपरा रही है कि चुनाव हारने के बाद मुख्यमंत्री खुद राज्यपाल से मिलकर कैबिनेट का इस्तीफा सौंपते हैं। वहीं उन्होंने आज शुभेंदु अधिकारी के सीएम के रूप में शपथ लेने के बाद अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल में बदल किया लेकिन कहीं भी पूर्व सीएम नहीं लिखा।

सोशल मीडिया पर प्रोफाइल में किया ये बदलाव

ममता ने ‘X’ और फेसबुक पर अपने परिचय से “माननीय मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल” हटाकर नया डिटेल्ड दिया है। अब उन्होंने खुद को अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस की संस्थापक अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की 15वीं, 16वीं और 17वीं विधानसभा की मुख्यमंत्री बताया है। विधानसभा चुनाव में भाजपा ने बड़ी जीत दर्ज करते हुए 293 में से 207 सीटों पर कब्जा किया, जबकि तृणमूल कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा।

विधानसभा चुनावों में टीएमसी की करारी हार

इस हार से बौखलाईं ममता ने साफ तौर पर कहा था कि वह सीएम पद से इस्तीफा नहीं देंगी। बाद में राज्यपाल ने ममता और उनकी कैबिनेट को बर्खास्त कर दिया। इसके बाद शुभेंदु अधिकारी ने सीएम पद की शपथ ली। भाजपा ने पश्चिम बंगाल की 18वीं विधानसभा के चुनावों में तृणमूल कांग्रेस को करारी शिकस्त दी है। बनर्जी 2011 में वाम दलों के 34 साल के शासन को समाप्त कर सत्ता में आई थी और गत तीन विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस नीत सरकार का नेतृत्व कर रही थीं।

चुनाव प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप

चुनावी हार के बावजूद बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं दिया और चुनाव प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाया। ममता ने दावा किया कि लगभग 100 सीटों पर धांधली और हेरफेर कर उन्हें हराया गया है। तृणमूल के वरिष्ठ नेताओं ने मतगणना और मतदान के दौरान केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग और अनियमितताओं के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि, चुनाव आयोग और भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।

विपक्षी दलों से एकजुटता की अपील

वहीं ममता ने सभी विपक्षी दलों से एक संयुक्त मंच बनाने के लिए एकजुट होने की अपील की। पूर्व मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों से जुड़े सभी छात्र संघों और गैर सरकारी संगठनों से भी भाजपा के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया। उनका यह बयान एक ऐसे दिन आया है, जब राज्य में भाजपा की पहली सरकार का गठन हुआ है।

ममता बनर्जी ने कहा, ”मैं सभी विपक्षी दलों, जिनमें वामपंथी और धुर-वामपंथी दल शामिल हैं, से भाजपा के खिलाफ एक संयुक्त मंच बनाने के लिए एकजुट होने का आह्वान करती हूं।” उन्होंने राष्ट्रीय दलों से भी इसमें शामिल होने की अपील की। तृणमूल प्रमुख ने कहा कि अगर कोई भी राजनीतिक दल इस संबंध में उनसे बातचीत करना चाहता है, तो वह उससे बात करने के लिए तैयार हैं। रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती पर कालीघाट स्थित अपने आवास के सामने एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ”यह सोचने का समय नहीं है कि दुश्मन का दुश्मन मेरा दोस्त है, हमारा पहला दुश्मन भाजपा है।”

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