June 15, 2026
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बीसीआर न्यूज़ (लखनऊ/उत्तर प्रदेश): मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े कदम उठाये हैं जिसके चलते घूसखोर कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है। दरअसल प्रदेश सरकार द्वारा अचानक ही प्रदेश की नगर पंचायतों, नगर पालिका परिषदों, नगर निगमों और विकास प्राधिकरणों में कार्यरत कर्मचारियों और अधिकारियों से उनकी संपत्ति और बैंक अकाउंट का ब्योरा मांग लिया गया है।

इस डिटेल को प्रोवाइड करने के लिए केवल एक सप्ताह का समय दिया गया है। इस तरह का आदेश आने पर नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है।

शहर को सुंदर व विकसित करने में स्थानीय निकायों की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है। शासन स्तर से विकास कार्यों के लिए समय-समय पर बड़ी योजनाओं के साथ ही बड़ी धनराशि आवंटित होती रहती है। योजनाओं में अक्सर कमीशनबाजी के आरोप लगते रहते हैं। इसी तरह की काली कमाई से किसी अधिकारी या कर्मचारी ने बेनामी संपत्ति और बैंक एकाउंट तो नहीं भर लिया है, इसको लेकर शासन ने सभी निकायों को पत्र जारी किया है।

सचिव श्रीप्रकाश सिंह के पत्र में कहा गया है कि समाज एवं सामाजिक व्यवस्था में बढ़ते हुए भ्रष्टाचार और भ्रष्ट आचरण की लगातार मिल रही शिकायतों के मद्देनजर शासन ने एक आदेश जारी किया। इसके तहत समूह घ के कर्मचारियों को छोड़कर सभी श्रेणी के अधिकारियों व कर्मचारियों से उनकी तथा उनके आश्रितों व पत्नी के नाम सभी चल-अचल संपत्ति का ब्योरा मांगा गया। इतना ही नहीं, विभिन्न बैंकों में उनके और आश्रितों की जमा धनराशि का विवरण घोषणा पत्र के रूप में उपलब्ध कराने को कहा गया है।

इसमें कहा गया कि जो कर्मचारी और अधिकारी अपनी संपति व कैश का घोषणा पत्र नहीं देंगे, उनकी संपतियों व कैश की जांच के लिए प्रकरण को आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा को सौंप दिया जाएगा। इस तरह का पत्र आने पर यहां नगर निगम के कर्मचारियों और अधिकारियों में हड़कंप की स्थिति बन गई है। पत्र में सारा ब्योरा देने के लिए केवल सात दिन का ही समय दिया गया है।

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