लेखिका: निशा सिंह (मेरे निजी विचार) ————————– अजय शास्त्री (संपादक व प्रकाशक)
बीसीआर न्यूज़/नई दिल्ली: आखिर कौन हैं सीमा आनंद, जो मुख्यतः सेक्स जैसे विषयों पर खुले तौर पर बात करती हैं. अपनी इसी बेबाकी की वजह से आज वे सुर्खियों में हैं।

सीमा लंदन में रहती हैं वे एक लेखिका, माइथोलॉजिस्ट, सेक्स एजुकेटर हैं. वे सेक्स को अश्लील नहीं मानती, बल्कि, इसे प्राकृतिक और उर्जा के रूप में समझने की बात करती हैं. वे सोशल मीडिया में आजकल इसलिए चर्चा में हैं, क्योंकि हाल ही में एक पाॅडकास्ट इंटरव्यू में उनके बयानों पर काफी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं उन्होंने बताया कि 15 साल के लड़के ने उन्हें आकर्षक बताया, जो चर्चा का विषय बना हुआ है, साथ ही उन्होंने कामसूत्र पर भी खुलकर चर्चा की, कुछ लोग उनकी बातों का समर्थन कर रहे हैं वहीं कुछ लोग आलोचना।
यह कहना, कि वे सौ फीसदी सही है या ग़लत हैं ठीक नहीं होगा, क्योंकि यह ज्यादातर व्यक्तिगत दृष्टिकोण और संस्कृति पर निर्भर करता है, वे सेक्स संबंधों पर खुलकर बात करने को बढ़ावा देती है ताकि लोग डर व शर्म महसूस न करें. यह एक सकारात्मक मानसिकता के लिए सही हो सकता है, लेकिन भारत जैसे देश में जहां सेक्स और कामुकता आज भी पर्दे में है। वहां ऐसी प्रतिक्रियाएं और आलोचना आना स्वाभाविक है।
माना कि सेक्स एजुकेशन जरूरी है, लेकिन जब उदाहरण नाबालिग से जुड़ती है, तो सावधानी बरतनी चाहिए. सीमा जैसे प्रभावशाली लोगों को समझना चाहिए कि उनके शब्दों का असर कहां तक जाएगा. अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ जवाबदेही भी आवश्यक है. पश्चिमी समाज और भारतीय समाज की संवेदनाएं अलग-अलग है इसलिए भारत में इस तरह के विचार रखते समय सांस्कृतिक, नैतिक और सामाजिक प्रभाव को नजरंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
सेक्स एजुकेशन जागरूकता के लिए हो, न कि सनसनी फैलाने के लिए होनी चाहिए। आधुनिकता के नाम पर हर बात सही नहीं हो जाती. संवाद के साथ मर्यादा का भी ध्यान देने की जरूरत है।
