अजय शास्त्री (वरिष्ठ पत्रकार)
बीसीआर न्यूज़/नई दिल्ली: दिल्ली में इमारतें गिरने का सिलसिला थम नहीं रहा। सत्य निकेतन में 5 मंजिला इमारत भरभराकर गिर गई। हादसे में 7 लोगों की मौत हुई। इसके साथ ही इस साल इमारत गिरने की घटनाओं में मरने वालों का आंकड़ा 16 पहुंच गया है। सरकारी आंकड़ों और पुलिस के बयानों के मुताबिक, इस साल अब तक 5 इमारतें गिर चुकी हैं। इनमें 3 हादसों में 16 लोगों की जान गई, जबकि दो अन्य घटनाओं में कई लोग घायल हुए और भारी नुकसान हुआ। अधिकारियों के मुताबिक, इन हादसों के पीछे कई जगह एक जैसी वजहें सामने आई हैं-बिना अनुमति निर्माण, अतिरिक्त मंजिलें, पुरानी इमारतें और स्ट्रक्चरल जांच की कमी।
गैरकानूनी निर्माण से कमजोर होती इमारतें
अधिकारियों के मुताबिक, कई इमारतों में नियमों को ताक पर रखकर निर्माण कराया गया। पुरानी इमारतों पर अतिरिक्त मंजिलें बना दी गईं। कई जगह निर्माण या मरम्मत के दौरान स्ट्रक्चरल सुरक्षा का ध्यान नहीं रखा गया। मॉनसून के दौरान लगातार बारिश से नींव, दीवारों और बेसमेंट में पानी पहुंचने से खतरा और बढ़ जाता है। विशेषज्ञों और अधिकारियों के मुताबिक, ऐसे मामलों में समय पर स्ट्रक्चरल जांच बेहद जरूरी है।
साकेत हादसे में 6 लोगों की मौत, MCD पर उठे गंभीर सवाल
30 मई को दक्षिण दिल्ली के साकेत इलाके में एक बहुमंजिला कमर्शियल इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई। इमारत में कोचिंग सेंटर, कैफे और ऑफिस चल रहे थे। हादसे में 6 लोगों की मौत हुई, जिनमें ज्यादातर छात्र थे। 8 लोग घायल भी हुए। दिल्ली सरकार के आदेश पर हुई मजिस्ट्रेट जांच में MCD को हादसे के लिए ‘मुख्य रूप से जिम्मेदार’ ठहराया गया। जांच में सामने आया कि इमारत में गैरकानूनी तरीके से तीसरी और चौथी मंजिल बनाई गई थी। नगर निगम को इस अवैध निर्माण की शिकायत हादसे से दो महीने से भी पहले मिल चुकी थी, लेकिन समय रहते कार्रवाई नहीं हुई।
हादसे के बाद रिकॉर्ड में हेरफेर का भी आरोप
मजिस्ट्रेट जांच में एक और गंभीर बात सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक, इमारत गिरने के बाद कुछ MCD अधिकारियों ने ऐसे रिकॉर्ड तैयार किए, जिससे यह दिखाया जा सके कि अवैध निर्माण के खिलाफ पहले ही कार्रवाई की जा चुकी थी। इसके बाद MCD ने दो इंजीनियरों को निलंबित कर दिया। पुलिस ने इमारत के मालिक और दो ठेकेदारों को गिरफ्तार किया।
रोहिणी में बारिश के बीच चार मंजिला इमारत गिरी
8 जुलाई को रोहिणी के सेक्टर-16 में भारी बारिश के बीच निर्माणाधीन चार मंजिला इमारत गिर गई। हादसे में तीन लोगों की मौत हुई और कई लोग मलबे में दब गए। MCD के मुताबिक, इमारत का नक्शा ‘सरल योजना’ के तहत मंजूर हुआ था। इस योजना में संपत्ति मालिक प्रमाणित आर्किटेक्ट या इंजीनियर के जरिए स्वयं सत्यापित अंडरटेकिंग जमा कर ऑटोमैटिक मंजूरी और बिल्डिंग परमिट हासिल कर सकते हैं। MCD ने यह भी संभावना जताई कि प्लंबिंग का काम करते समय स्ट्रक्चरल बीम और कॉलम काटे जाने से इमारत की मजबूती प्रभावित हुई हो सकती है।
मुकुंदपुर में LPG सिलेंडर फटने के बाद गिरी इमारत
2 जून को उत्तरी दिल्ली के मुकुंदपुर में LPG सिलेंडर फटने के बाद एक मंजिला मकान ढह गया। इस मकान में कथित तौर पर गैरकानूनी तरीके से बर्तन रंगने की फैक्ट्री चल रही थी। हादसे में 11 मजदूर मलबे में फंस गए और घायल हुए। इनमें से एक की हालत गंभीर बताई गई।
करावल नगर में नाले की मरम्मत के दौरान इमारत में दरारें
3 जून को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के करावल नगर में चार मंजिला इमारत ढह गई। बताया गया कि पास में नाले की मरम्मत का काम चल रहा था और इसी दौरान इमारत में दरारें आ गई थीं। हालांकि राहत की बात यह रही कि इमारत के सभी निवासियों को समय रहते बाहर निकाल लिया गया था। इस वजह से इस हादसे में किसी की मौत नहीं हुई।
सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD का बड़ा एक्शन
सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिरने के बाद MCD ने 5 अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही नगर निगम ने सभी जोन के एग्जीक्यूटिव इंजीनियरों (बिल्डिंग) को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली इमारतों का निरीक्षण करने का निर्देश दिया है। अधिकारियों को 10 सितंबर तक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।
हर जोन की निगरानी करेंगे एडिशनल कमिश्नर
MCD के आदेश के मुताबिक, हर जोन के एडिशनल कमिश्नर व्यक्तिगत रूप से निरीक्षण और रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया की निगरानी करेंगे। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इन निरीक्षणों से दिल्ली की कमजोर और खतरनाक इमारतों की पहचान समय रहते हो पाएगी? या फिर किसी अगले हादसे के बाद ही सिस्टम जागेगा?
कई महीनों से लगातार एमसीडी को सूचित किया जा रहा है कि पीतमपुरा के वीपी ब्लॉक में भी अतिक्रमण की हदें पार हो चुकी हैं और कभी भी किसी भी दिन किसी हादसे का शिकार हो सकता है।
आपको बता दें कि पीतमपुरा के वीपी ब्लॉक में अतिक्रमण को लेकर एमसीडी केशवपुरम जोन पर दिल्ली सरकार के निर्देशों की अनदेखी के आरोप लगाते हुए स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ दबंगों ने गलियां बंद कर सीवर लाइन तक घरों के अंदर ले ली गई है, जिससे पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। उनका कहना है कि आखिर कब होगी अतिक्रमणकारियों पर कार्रवाई ? यदि आग या अन्य आपातकालीन स्थिति यहां पैदा हुई तो फायर ब्रिगेड और एम्बुलेंस तक नहीं पहुंच पाएगी |
शिकायतकर्ता का कहना है कि मुख्यमंत्री कार्यालय से भी 11 से अधिक बार संबंधित विभागों को कार्रवाई के निर्देश दिए जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। एमसीडी के EE सुनील जैन ने फाइल को बिल्डिंग विभाग में भेजा लेकिन बिल्डिंग विभाग के जेई राहुल जयसवाल का कहना है कि ये काम मेंटेंनेंस विभाग का है अब यहाँ से खेल शुरू होता है, जहां पहले जेई ललित कुमार और बाद में जेई राहुल जायसवाल ने इसे अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बताते हुए मेंटेनेंस विभाग का मामला बताया।
इसके अलावा स्थानीय निवासियों ने अपने स्तर पर भी शिकायत भेजी हुई है जिस फाइल का नंबर File No.90/Date:17.06.2026 to EE(B-I) /KPZ है, इस फाइल को भी बिल्डिंग विभाग के जेई राहुल जयसवाल ने रोका हुआ है।
वहीं, एक्जीक्यूटिव इंजीनियर सुनील जैन का स्पष्ट कहना है कि यह मामला बिल्डिंग विभाग के अधिकार क्षेत्र का है, इसलिए फाइल वहीं भेजी गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विभागों के बीच जिम्मेदारी टालने से अतिक्रमण लगातार बढ़ रहा है और प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है।
