अजय शास्त्री (वरिष्ठ पत्रकार)
बीसीआर न्यूज़/नई दिल्ली: यदि सरकारी या रेलवे की जमीन पर वर्षों से बसे लोगों के पुनर्वास के लिए उन्हें आवास देने की योजनाएँ बनाई जा सकती हैं, तो हमारे बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और उज्ज्वल भविष्य के लिए भी ऐसी दूरदर्शी योजना क्यों नहीं बनाई जा सकती?
जहाँ कॉलेज और विश्वविद्यालय हों, वहाँ उपलब्ध शैक्षणिक सीटों के अनुपात में पर्याप्त हॉस्टल की सुविधा भी हो, ताकि विद्यार्थी प्रवेश लेते ही सुरक्षित, किफायती और बेहतर आवास प्राप्त कर सकें। इससे उन्हें महंगे पीजी और असुरक्षित आवास के लिए भटकना नहीं पड़ेगा, अभिभावकों का आर्थिक बोझ कम होगा और बच्चों को पढ़ाई के लिए बेहतर वातावरण मिलेगा।
शिक्षा केवल कॉलेज बनाने से नहीं सुधरेगी—शिक्षा के साथ सुरक्षित आवास, हॉस्टल और आवश्यक सुविधाएँ भी जरूरी हैं।
इसके साथ दिल्ली को मजबूत और आधुनिक Disaster Management System की भी आवश्यकता है। यदि किसी बहुमंजिला इमारत के ढहने जैसी गंभीर आपदा की स्थिति उत्पन्न हो, तो प्रशिक्षित टीम को जीरो टाइम के भीतर घटनास्थल पर पहुँचकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू करने में सक्षम होना चाहिए।
इसके लिए दिल्ली में आधुनिक उपकरण, विशेष रेस्क्यू मशीनरी और प्रशिक्षित विशेषज्ञों की स्थायी टीम हो। इस टीम में ऐसे सेवानिवृत्त अधिकारी, इंजीनियर, तकनीकी विशेषज्ञ और अनुभवी कर्मियों को भी शामिल किया जा सकता है, जिन्हें आपदा प्रबंधन और बचाव कार्य का वास्तविक अनुभव हो।
इन विशेषज्ञों की नियमित ट्रेनिंग, मॉक ड्रिल और अभ्यास लगातार चलते रहने चाहिए, ताकि किसी भी आपदा के समय टीम बिना समय गंवाए तत्काल कार्रवाई कर सके।
बच्चों के भविष्य में निवेश हो या आपदा के समय जीवन बचाने की तैयारी—दोनों ही मजबूत और दूरदर्शी शासन की पहचान हैं।
सरकार और नीति-निर्माताओं से विनम्र अनुरोध है कि इन दोनों विषयों पर गंभीरता से विचार किया जाए।
सुरक्षित विद्यार्थी और सुरक्षित नागरिक—यही मजबूत दिल्ली और मजबूत भारत की नींव हैं।
