अजय शास्त्री (वरिष्ठ पत्रकार)
बीसीआर न्यूज़/नई दिल्लीः दिल्ली हाई कोर्ट ने मंगलवार को 2008 के सीरियल बम धमाकों के मामले में इंडियन मुजाहिदीन के एक कथित सदस्य की जमानत याचिका खारिज कर दी। जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मधु जैन की बेंच ने मंसूर असगर पीरभोय की अपील खारिज कर दी, जिसमें उसने जमानत न देने के निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी थी। निचली अदालत ने पिछले साल 19 जुलाई को पीरभोय की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
जमानत की अपील खारिज
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक अदालत ने उसकी जमानत की अपील खारिज करते हुए कहा कि पीरभोय इंडियन मुजाहिदीन के मीडिया सेल का प्रमुख है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष के अनुसार, वह एक ईमेल भेजने में शामिल था जिसमें ‘मौत का संदेश’ था और उस ईमेल के ठीक 5 मिनट बाद बम हमलों की सफलता का दावा किया गया था। अदालत ने आगे कहा कि इस तरह का तालमेल, योजना और लॉजिस्टिक्स केवल कुशल तकनीक के इस्तेमाल से ही संभव था और पीरभोय इसके केंद्र में था।
यह अपराध गंभीर प्रकृति का हैः कोर्ट
कोर्ट ने यह भी माना कि यह अपराध गंभीर प्रकृति का है क्योंकि इसमें 26 लोगों की जान चली गई और 100 से ज्यादा लोग घायल हुए। दिल्ली पुलिस का आरोप था कि पीरभोय ने दूसरे आरोपियों के साथ मिलकर अहमदाबाद, मुंबई और दिल्ली में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के बारे में इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया को ईमेल भेजे थे।
मंसूर असगर पीरभोय पर आरोप क्या हैं?
सितंबर 2008 में मुंबई पुलिस द्वारा उसकी गिरफ्तारी के बाद, अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि उसके पास से लैपटॉप, वाई-फाई हॉटस्पॉट फाइंडर, रेडियो फ्रीक्वेंसी सिग्नल डिटेक्टर, हार्ड डिस्क, हिडन कैमरा डिटेक्टर और इंटरनेट कनेक्टर जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए। उस पर भारतीय दंड संहिता (साजिश, हत्या और युद्ध छेड़ने से संबंधित अपराधों सहित), गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की कई धाराओं के तहत आरोप पत्र दाखिल किया गया था।
