अजय शास्त्री (वरिष्ठ पत्रकार)
बीसीआर न्यूज़/नई दिल्ली: ऑर्गनाइजर के 80 वर्ष पूरे होने पर एलके आडवाणी की बेटी प्रतिभा आडवाणी को सम्मानित किया गया, चेयरमैन हेमंत द्विवेदी ने विरासत को नमन किया.
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री लालकृष्ण आडवाणी की बेटी प्रतिभा आडवाणी को ऑर्गनाइजर ने सम्मानित किया है. ऑर्गनाइजर ने निडर पत्रकारिता के 80 साल पूरे होने का जश्न मनाया. एलके आडवाणी ने ‘ऑर्गनाइजर’ के शुरुआती दौर में इसके संपादक के रूप में काम किया था.
ऑर्गनाइजर ने कहा कि प्रतिभा आडवाणी को सम्मानित करके हमने उस स्थायी विरासत को नमन किया, एक ऐसी विरासत जो पाठकों, लेखकों और पत्रकारों की पीढ़ियों को प्रेरित करती रहती है. कुछ विरासतें इतिहास में दर्ज होती हैं तो कुछ उन संस्थानों के जरिए जीवित रहती हैं जिन्हें बनाने में उन्होंने मदद की थी.
भारत के सबसे बड़े राजनीतिक नेताओं में शुमार होने से बहुत पहले, एलके आडवाणी ने एक पत्रकार और संपादक के तौर पर ‘ऑर्गनाइजर’ में योगदान दिया था. उन्होंने सिद्धांतों पर आधारित पत्रकारिता और राष्ट्रीय सोच के प्रति इस प्रकाशन की प्रतिबद्धता को मजबूत करने में मदद की. ‘ऑर्गनाइजर’ के इतिहास में उनका जुड़ाव एक अहम अध्याय बना हुआ है. प्रतिभा आडवाणी को सम्मानित करके ‘ऑर्गनाइजर’ ने उस स्थायी विरासत को नमन किया, जो पाठकों, लेखकों और पत्रकारों की पीढ़ियों को प्रेरित करती रहती है.
‘ऑर्गनाइजर’ ने अपने 80 वर्ष पूरे करते हुए देश की पत्रकारिता में अपनी एक अलग पहचान बनाई है. यह प्रकाशन हमेशा से राष्ट्रवाद, सांस्कृतिक जागरण और सत्य की वकालत के लिए जाना जाता रहा है. इस दौरान कई ऐतिहासिक घटनाओं को निडरता से कवर किया गया. एलके आडवाणी के संपादकीय काल में ‘ऑर्गनाइजर’ ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर मजबूत रुख अपनाया. उनकी पत्रकारिता ने बाद में राजनीति में भी उन्हें मजबूत आधार दिया.
सम्मान समारोह में प्रतिभा आडवाणी ने पिता की विरासत को याद करते हुए भावुकता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि पिता हमेशा सिद्धांतों पर चलने और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने के पक्षधर रहे. ‘ऑर्गनाइजर’ के 80 वर्ष पूरे होने का यह अवसर न सिर्फ अतीत को याद करने का है, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने का भी है. संस्थान ने संकल्प लिया है कि वह आगे भी निडर और सत्यनिष्ठ पत्रकारिता की परंपरा को बनाए रखेगा. संस्थान ने कहा- यह आयोजन उन सभी पत्रकारों और विचारकों को श्रद्धांजलि है जिन्होंने ‘ऑर्गनाइजर’ को आज की मजबूत पहचान दी.
