अजय शास्त्री (वरिष्ठ पत्रकार)
बीसीआर न्यूज़/नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में सार्वजनिक स्थानों पर पेशाब और थूकने जैसी गतिविधियों पर सख्त कानून होने के बावजूद अधिकांश इलाकों में इन नियमों का पालन कराना लगभग ठप नजर आ रहा है. पिछले पांच वर्षों के आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि नगर निगम के अधिकांश जोन में इस तरह के मामलों में एक भी चालान जारी नहीं किया गया. दूसरी ओर, शहर के कई सार्वजनिक शौचालयों की खराब स्थिति, बंद सुविधाएं और गंदगी यह संकेत देती हैं कि स्वच्छता व्यवस्था और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर मौजूद है.
पांच साल में सिर्फ एक एमसीडी जोन में हुई कार्रवाई
नगर निगम के उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, बीते पांच वर्षों में सार्वजनिक स्थानों पर पेशाब और थूकने के मामलों में कार्रवाई केवल शाहदरा नॉर्थ जोन में दर्ज की गई. यहां सार्वजनिक स्थान पर पेशाब करने के 224 और थूकने के 156 चालान काटे गए. इसके विपरीत सेंट्रल, करोल बाग, सिविल लाइंस, साउथ, वेस्ट, केशव पुरम, नरेला, रोहिणी और नजफगढ़ समेत अन्य सभी एमसीडी जोन में इस अवधि के दौरान ऐसे किसी भी मामले में चालान जारी नहीं हुआ.
एनडीएमसी क्षेत्र में हजारों चालान, लाखों रुपये का जुर्माना
एमसीडी की तुलना में नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (एनडीएमसी) का रिकॉर्ड अलग तस्वीर पेश करता है. वर्ष 2020-21 से 2026-27 के बीच एनडीएमसी ने सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाने से जुड़े 11,534 चालान जारी किए. इन मामलों में कुल 5.76 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया, जिसमें से 8,770 चालानों के जरिए 4.38 लाख रुपये की वसूली भी की गई.
आंकड़ों के अनुसार, 2022-23 में सबसे अधिक 4,859 चालान जारी हुए. इसके बाद 2023-24 में 3,000, 2024-25 में 2,130, 2025-26 में 920 और वर्ष 2026 में अब तक 155 चालान दर्ज किए गए.
एनडीएमसी और एमसीडी के जुर्माने की रकम में अंतर
एनडीएमसी क्षेत्र में सार्वजनिक स्थान पर पेशाब या शौच करने पर 500 रुपये और थूकने पर 1,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाता है. वहीं एमसीडी क्षेत्र में नियम अलग हैं. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों के तहत ऐसे मामलों में 5,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है, जबकि दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 के तहत सार्वजनिक स्थान पर पेशाब करने पर महज 50 रुपये का प्रावधान है. प्रस्तावित संशोधन विधेयक में इस राशि को बढ़ाकर 500 रुपये करने की बात कही गई है.
जमीनी हकीकत में बदहाल मिले कई सार्वजनिक शौचालय
निरीक्षण के दौरान एनडीएमसी क्षेत्र के अधिकांश सार्वजनिक शौचालय साफ-सुथरे और व्यवस्थित मिले, लेकिन कुछ प्रमुख स्थानों पर स्थित शौचालय बंद पाए गए. वहीं एमसीडी के अधीन कई शौचालयों की स्थिति बेहद खराब नजर आई. सिविक सेंटर के पीछे स्थित सार्वजनिक यूरिनल (मूत्रालय) जर्जर अवस्था में मिला. भवन में दरारें, टूटी छत, जंग लगी सरिया, गंदगी से भरे फर्श और खराब दरवाजे जैसी समस्याएं दिखाई दीं. पास स्थित पुरुष शौचालय भी बंद मिला, जिससे लोगों को परेशानी उठानी पड़ी.
महिलाओं को पेट्रोल पंप के शौचालय भेजने की नौबत
लाजपत नगर बाजार, सुप्रीम कोर्ट संग्रहालय और फ्लाईओवर के पास कई महिला शौचालय बंद मिले. कुछ स्थानों पर दिव्यांगजनों के लिए बनाई गई सुविधाएं भी ताले में बंद थीं. डिफेंस कॉलोनी के एक सार्वजनिक शौचालय में पुरुषों का शौचालय खुला था, लेकिन महिला शौचालय बंद मिला. वहां मौजूद कर्मचारियों ने महिलाओं को पास के पेट्रोल पंप का शौचालय इस्तेमाल करने की सलाह दी.
कालकाजी मार्केट में महिलाओं के शौचालय के भीतर एक पुरुष मौजूद मिला, जबकि वहां कोई सुरक्षा कर्मी या कर्मचारी नहीं था. इस तरह की घटनाओं ने सार्वजनिक सुविधाओं की सुरक्षा और निगरानी पर भी सवाल खड़े किए हैं.
कई जगह गंदगी, बदबू और बहता गंदा पानी
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास सार्वजनिक शौचालय से निकलने वाला गंदा पानी सड़क तक बहता मिला, जिससे आसपास दुर्गंध और अस्वच्छ माहौल बना हुआ था. कुछ पे-एंड-यूज शौचालयों में फर्श पर गंदा पानी जमा था, दरवाजे टूटे हुए थे और अंदर सफाई का अभाव दिखाई दिया. कई स्थानों पर लोग शौचालय परिसर के भीतर ही सोते हुए भी मिले.
कार्रवाई में कर्मचारियों को झेलनी पड़ती है मुश्किलें
एनडीएमसी के एक अधिकारी के अनुसार, सार्वजनिक स्थानों पर पेशाब या थूकने वालों के खिलाफ कार्रवाई करना आसान नहीं होता क्योंकि कई लोग विरोध करने लगते हैं और कई बार कर्मचारी आक्रामक व्यवहार का भी सामना करते हैं. अधिकारी का दावा है कि एनडीएमसी क्षेत्र के 90 प्रतिशत से अधिक सार्वजनिक शौचालय साफ, व्यवस्थित और निशुल्क उपलब्ध हैं तथा केवल कुछ सुविधाएं अस्थायी रूप से बंद रहती हैं.
वहीं एमसीडी के एक अधिकारी का कहना है कि नियम तोड़ने वालों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की होती है जो दिल्ली के स्थायी निवासी नहीं होते. इनमें ट्रक चालक, परिवहन कर्मी और थोक बाजारों में आने वाले बाहरी लोग शामिल हैं. पहचान संबंधी दस्तावेज नहीं होने के कारण कई मामलों में कानूनी कार्रवाई और जुर्माने की वसूली मुश्किल हो जाती है.
‘सार्वजनिक शौचालयों की हालत चिंताजनक’
नवादा मेट्रो स्टेशन के पास मोहन गार्डन निवासी देवेंद्र कुमार ने बताया कि पहले मेट्रो स्टेशन के नीचे शौचालय बनी हुई थी जिसकी सफाई न के बराबर होती थी. शौचालय से लगातार पेशाब का पानी बाहर बहता रहता था और आसपास इतनी बदबू होती है कि वहां से गुजरना भी मुश्किल हो जाता है. वहां शाम के समय जब फूड स्ट्रीट का स्टॉल लगता था तो लोगों को खासी परेशानी होती थी.
उत्तम नगर निवासी रवि का कहना है कि उत्तम नगर से नजफगढ़ रूट पर जो एक दो कूड़ाघर है दुकानदार और वहां आए ग्राहक वही बाथरूम जाते हैं. लगभग 3 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी में सिर्फ मेट्रो स्टेशन पर सुलभ शौचालय बनी हुई है जिसकी सफाई बहुत कम होती है जिससे कही आमलोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है.
खरीदारी करने आए लोगो के साथ आयीं महिला यात्रियों का कहना है कि जब वो अपने परिजन के साथ आते हैं तो फ्रेस होने के लिए सार्वजनिक शौचालयों के बजाय किसी रेस्तरां की सुविधा का उपयोग करना बेहतर समझते हैं, क्योंकि शहर के अधिकांश सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति भरोसेमंद नहीं होती है.
