July 7, 2026
BCR News Delhi High Court

अजय शास्त्री (वरिष्ठ पत्रकार)

बीसीआर न्यूज़/नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने OBC आरक्षण के नियमों को लेकर दिल्ली सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है…अदालत ने कहा कि सरकार ने एक के बाद एक नोटिफिकेशन, सर्कुलर और पत्र जारी कर ऐसा भ्रम पैदा कर दिया है कि न सिर्फ उम्मीदवार बल्कि अदालत के लिए भी यह समझना मुश्किल हो गया कि आखिर कौन ओबीसी आरक्षण का हकदार है और कौन नहीं.

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि दिल्ली सरकार ने ओबीसी आरक्षण के मामले में पूरी तरह अफरा-तफरी की स्थिति पैदा कर दी है. अदालत ने टिप्पणी की कि अलग-अलग समय पर जारी किए गए नोटिफिकेशन और अस्पष्ट भाषा वाले विज्ञापनों ने पूरे सिस्टम को उलझाकर रख दिया है.

उम्मीदवार इंटरनेट क्यों खंगाले- हाईकोर्ट

हाईकोर्ट ने साफ कहा कि भर्ती विज्ञापन में पात्रता की सभी शर्तें साफ और सीधे शब्दों में लिखी जानी चाहिए. सिर्फ यह लिख देना कि नियम समय-समय पर जारी निर्देशों के अनुसार होंगे, पर्याप्त नहीं है. अदालत ने कहा कि किसी उम्मीदवार से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह इंटरनेट पर हर नोटिफिकेशन और सर्कुलर खोजकर अपनी पात्रता तय करे…ऐसा करना न सिर्फ अनुचित है बल्कि कानूनी रूप से भी टिकाऊ नहीं है.

क्या था पूरा मामला?

मामला शिक्षा निदेशालय में स्पेशल एजुकेटर की भर्ती से जुड़ा था. याचिकाकर्ता ने OBC श्रेणी में आवेदन किया था. उसका दावा था कि उसकी जाति दिल्ली की केंद्रीय OBC सूची में शामिल है, इसलिए उसे आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए.

DSSSB ने क्यों किया आवेदन खारिज?

दिल्ली सबऑर्डिनेट सर्विस सेलेक्शन बोर्ड ने उम्मीदवार की उम्मीदवारी इसलिए खारिज कर दी क्योंकि उसका OBC प्रमाणपत्र दिल्ली सरकार द्वारा जारी नहीं किया गया था. यह प्रमाणपत्र उसके पिता को बिहार भवन से मिले पुराने प्रमाणपत्र के आधार पर बना था, जबकि भर्ती विज्ञापन में दिल्ली सरकार द्वारा निर्धारित तरीके से जारी OBC प्रमाणपत्र अनिवार्य बताया गया था.

कोर्ट ने क्या फैसला दिया?

हाईकोर्ट ने माना कि उम्मीदवार की जाति OBC श्रेणी में आती है, लेकिन उसका OBC प्रमाणपत्र भर्ती विज्ञापन की शर्तों के अनुरूप नहीं था. अदालत ने कहा कि यदि उम्मीदवार ने विज्ञापन की शर्तों को चुनौती दिए बिना आवेदन किया है, तो बाद में उन शर्तों को नजरअंदाज नहीं कर सकता.

इन सभी तथ्यों को देखते हुए हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी. हालांकि, अदालत ने दिल्ली सरकार को स्पष्ट संदेश दिया कि भविष्य में भर्ती विज्ञापनों और आरक्षण से जुड़े नियमों को साफ, सरल और बिना किसी भ्रम के जारी किया जाए, ताकि उम्मीदवारों को बेवजह परेशानी का सामना न करना पड़े.

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