अजय शास्त्री (वरिष्ठ पत्रकार)
बीसीआर न्यूज़/नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली पुलिस की आईएफएसओ यूनिट ने महज 20 रुपये में फर्जी आधार कार्ड और 15 रुपये में वोटर आईडी बनाने वाली वेबसाइट का भंडाफोड़ किया है.
राजधानी दिल्ली में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बीच पहचान संबंधी दस्तावेजों को लेकर सुरक्षा और सत्यापन पर जोर दिया जा रहा है. इसी दौरान दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की आईएफएसओ यूनिट ने एक ऐसे ऑनलाइन रैकेट का खुलासा किया है, जहां महज 20 रुपये में आधार कार्ड और 15 रुपये में वोटर आईडी जैसे फर्जी दस्तावेज तैयार किए जा रहे थे. पुलिस ने खुद वेबसाइट पर डमी दस्तावेज बनवाकर पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ किया.
शुरुआती जांच में सामने आया है कि वेबसाइट पर आधार, वोटर आईडी, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, आरसी, जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र, जाति और निवास प्रमाण पत्र समेत कई सरकारी दस्तावेज तैयार किए जा रहे थे. मामले में स्पेशल सेल ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
साइबर पेट्रोलिंग के दौरान राज तब खुला दिल्ली जब पुलिस की स्पेशल सेल की आईएफएसओ यूनिट नियमित साइबर पेट्रोलिंग और सोशल मीडिया मॉनिटरिंग कर रही थी. इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि bkprint.in नाम की वेबसाइट पैसे लेकर फर्जी सरकारी दस्तावेज तैयार कर रही है. जांच में पता चला कि वेबसाइट के जरिए आधार कार्ड, वोटर आईडी, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन की आरसी, जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, राशन कार्ड और हेल्थ कार्ड समेत कई सरकारी दस्तावेज तैयार किए जा रहे थे.
वेबसाइट की सच्चाई जानने के लिए आईएफएसओ यूनिट के एक सब-इंस्पेक्टर ने सतीश कुमार के नाम से यूजर आईडी बनाई. वेबसाइट का इस्तेमाल करने के लिए पहले 100 रुपये वॉलेट में रिचार्ज किए गए. इसके बाद अधिकारी ने आधार कार्ड बनवाने के लिए नाम, पता, जन्मतिथि और फोटो जैसी जानकारी दर्ज की. वेबसाइट ने वॉलेट से 20 रुपये काटकर कुछ ही देर में आधार कार्ड जैसा दिखने वाला दस्तावेज तैयार कर दिया.
इस फर्जीवाड़े पता तब चला जब क्यूआर कोड/बारकोड को स्कैन किया गया स्कैन करते ही सारी सच्चाई सामने आ गई, जी हाँ, जब पुलिस ने तैयार किए गए फर्जी आधार कार्ड पर मौजूद क्यूआर/बारकोड को स्कैन किया तो उसमें वही जानकारी दिखाई दी, जो वेबसाइट पर दर्ज की गई थी. जांच में पता चला कि यह जानकारी UIDAI के आधिकारिक डेटाबेस से नहीं, बल्कि वेबसाइट के अपने सर्वर से दिखाई जा रही थी. इससे साफ हो गया कि वेबसाइट असली जैसे दिखने वाले फर्जी दस्तावेज तैयार कर रही थी.
जांच के दौरान पुलिस ने वोटर कार्ड के लिए एक काल्पनिक एपिक नंबर और अन्य जानकारी दर्ज कर वोटर आईडी भी तैयार करवाई. वेबसाइट ने 15 रुपये लेकर असली जैसी दिखने वाली वोटर आईडी तैयार कर दी. इससे पुलिस को पुष्टि हो गई कि वेबसाइट मनचाही जानकारी के आधार पर फर्जी पहचान संबंधी दस्तावेज तैयार कर रही थी.
अब आपको बताते है कि वेबसाइट पर कौन कौन सी सेवाएं मिल रही थीं, एफआईआर के मुताबिक वेबसाइट पर आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन की आरसी, जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, राशन कार्ड और हेल्थ कार्ड के अलावा पैन री-प्रिंट, आधार एड्रेस अपडेट, आधार-पैन लिंक, मार्कशीट और अन्य दस्तावेजों से जुड़ी कई सेवाएं भी उपलब्ध थीं.
स्पेशल सेल के मुताबिक ऐसे फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल सरकारी विभागों, बैंकों और वित्तीय संस्थानों को धोखा देने, असली सरकारी दस्तावेज हासिल करने, पहचान चोरी , फर्जी पहचान , साइबर फ्रॉड और वित्तीय धोखाधड़ी जैसे अपराधों में किया जा सकता है. पुलिस का मानना है कि यह एक संगठित आपराधिक नेटवर्क है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी खतरा पैदा हो सकता है.
स्पेशल सेल ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है. पुलिस, वेबसाइट के मालिकों, ऑपरेटरों और पूरे नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान करने में जुटी है. इसके अलावा डिजिटल पेमेंट ट्रेल, बैंक खातों और अन्य डिजिटल सबूतों की जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस वेबसाइट के जरिए अब तक कितने लोगों ने फर्जी दस्तावेज बनवाए और इस रैकेट में कौन-कौन शामिल है.
