तितली का परिवार, परिवार नहीं होता – अविनाश वाचस्पति
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बीसीआर न्यूज़ (नई दिल्ली): तितली हिंदी मूवी के मुख्य कलाकारों से मुलाकात नोएडा के स्पाइस मॉल में पत्रकारों के लिए संपन्न हई। तितली एक मनमोहक कीट है जो अपनी उड़ान से मन को मोह लेती है। जरूरी नहीं है कि यह पीली ही हो या किसी एक रंग में कैद हो। यह हर रंग में यहां वहां उड़ती दिखाई देती है। आजकल आधुनिकता के व्यापक प्रचार प्रसार के कारण वह यत्र तत्र सर्वत्र नहीं दिखलाई देती हैं। पर लगन हो और इंसान कोशिश करे तो उसे तलाश ही लेता है। बच्चों के मन को खूब लुभाती है।
तितली के बरअक्स मधु मक्खी एक बेहद उपयोगी कीट है पर उसे पकड़ने के लिए माहिर होना बहुत जरूरी है। अगर उसे लापरवाही से उसे पकड़ने की कोशिश की जाए तो लेने के देने पड़ जाते हैं। यह छत्ते में रहती है और छत्ते यानी समूह में एक-दूसरे से चिपटकर एक अजीब सी गूंज करते हुए रहा आसान नहीं है। सामूहिकता में रहने का एक नायाब नजारा पेश करती है मघु मक्खी, यह अपने आसपास के एरिए में उडकर फूलों से परागकणों को लाकर इकट्ठा करने के अनथक प्रयत्न में लगी रहती है। इनका ण्क भरा पूरा परिवार होता है। इनके एकत्र किए हुए शहद को हथियाने के लिए इंसान ताक में रहता है और अपने शरीर पर कंबल लपेटकर और एक डण्डे में कपड़ा बांधकर मशाल जलाकर धुंआ करके इन्हें भगाकर इनके शहद के छत्ते को तोड़कर एक बर्तन में ले जाता है और उसमें से शहद निकालकर बेच देता है।
तितली की एक खासियत या कमी कही जाएगी कि यह परिवार में नहीं रहती है। यहां वहां उड़ती फिरती है। तितली का परिवार नहीं होता है जबकि हर जगह गंदगी, रसोई व कमरों में लाल व सफेद रंग के कोकरोच पाए जाते हैं। इनमें बढ़त दो से तीन चार नहीं, अपितु दो से दो सौ तक हो सकती है। यह अंधेरे कोने में छिप जाते हैं और रात होते ही बरतनों और खाने के टुकड़ों पर हमला बोल देते हैं। इन्हें देखकर मन में घृणा का भाव पैदा होता है और एक लिजलिजापन महसूस होता है।
जबकि निर्देशक बिकास चौधरी ने तितली की भूमिका को केन्द्र में रखकर कई कहानियो की रचना की और एक अलग तरह की कथा की रचना की। फिर उसमें से एक कहानी को छांटकर तितली नामक फिल्म बनाई। बीसीआर न्यूज के प्रख्यात साहित्यकार-समीक्षक अविनाश वाचस्पति ने कोकरोच को लेकर फिल्म बनाने के लिए एक सवाल दाग दिया जिससे निर्देशक को जवाब देने में मुश्किल हो गई जबकि फिल्म के कलाकार मिलिंद खांडेकर ने इस प्रश्न के लिए दिल से तारीफ की और इस संवाददाता का नाम जाना। इस सवाल पर उन्होंने खूब खुशी जाहिर की। फिल्म का जल्दी ही प्रीमियर होने वाला है तब देखना यह होना कि फिल्म कितना दाम बटोरती है। तितली से नाम तो वह बटोर ही चुकी है। इसी से फिल्म की सफलता की कहानी तय होगी।