“वॉक फॉर ह्यूमैनिटी”: नेहा काला की एक सशक्त पहल

बीसीआर न्यूज़ (नई दिल्ली): आज कल के दौर में ज़िंदगी की आपाधापी के बीच मनुष्य वो सब हासिल करने की जद्दोजहद में लगा हुआ है जो उसकी मूलभूत आवश्यकताएं हैं। लेकिन कुछ लोग लीक से हटकर बहुत कुछ करने की नियत से सामाजिक उत्थान के लिए कार्य कर रहें हैं। वैसे ही एक शख़्स ‘नेहा काला’ हैं जिन्होंने आज से लगभग चार साल पहले एक ऐसी संस्था की नींव रखी थी जो अनाथ, बेघर व मज़लूमों के लिए निरंतर प्रयासरत है। “वी वेलफेयर सोसायटी”, देश के समाज सुधारकों व अपने दम पे बदलाव लाने वाले लोगों को हर साल “बी ह्यूमैनिटी एक्सीलेंस अवार्ड” से सम्मानित भी करती है, जिसका सिलसिला 2015 से शुरू हुआ था। इसी तर्ज पर इस बार भी नेहा काला अपनी संस्था “वी वेलफेयर सोसायटी” की झंडी तले “वॉक फॉर ह्यूमैनिटी” का भव्य आयोजन करने वाली हैं, जो उनके ही पूर्व आयोजन “ह्यूमैनिटी एक्सीलेंस अवार्ड” का नवीन व मिश्रित रूप है। यह आयोजन 05 अप्रैल 2018 को ‘सिरीफोर्ट’ के भव्य सभागार में होना है जहाँ देश के सर्वोच्च ‘सामाजिक बदलाव के पुरोधा’ मौजूद होंगे। दीपक मजुमदार (कत्थक नाट्य गुरु), रूपक मेहता (ब्रह्मांड नृत्य अकादमी), संदीप सोपारकर (अंग्रेज नृत्य गुरु), रिचा चुतानी (टैरोट विशेषज्ञ), दुर्गा दास (हास्य कलाकार), तालीस रिज़वी (समाज सेवक, महिला विकास, दिल्ली प्रदेश), अल्का कपूर (प्रधानाचार्या, मॉडर्न स्कूल), गुलराज शाहपुरी, हिमाद्रिश सुवन (युवा अध्यक्ष, दिल्ली प्रदेश) व आरूषि गुप्ता जैसे उच्च शख़्सियत वाले लोग भी शामिल रहेंगे। दीपक मजुमदार के स्वर्णिम व प्रतिष्ठित ज़िंदगी में तमाम सफलताओं के लिए ‘लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड, से नवाज़ा जाएगा। इसी तरह कुल ग्यारह लोगों को इस आयोजन में सम्मानित किया जाएगा। इस कार्यक्रम के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहेगा, जब सभी उच्चासीन लोग मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज कर मानवता को समर्पित करके “वॉक” करेंगे।

इस आयोजन की अनिवार्य शर्त यही है कि सभी प्रतिभागियों के पास एक पुख़्ता विचारधारा होना चाहिए जिसको एक रचनात्मक रूप दिया जा सके।
नेहा काला के इस नेक कार्य के प्रयोजन पर ‘स्टाइल दीवा व सशक्त समाजसेवी पूनम सैनी’ का कहना है कि ” नेहा काला के इस पहल का हर व्यक्ति को स्वागत करना चाहिए ताकि समाज में ऐसे शुभचिंतकों की संख्या में गुणोत्तर वृद्धि हो। आज के स्वार्थ से ओतप्रोत समाज में कुछ वर्ग नेहा काला जैसे होने चाहिए चूंकि, अपना जीवनयापन तो पशु भी कर ही लेते हैं लेकिन मानव की उत्पत्ति ही परोपकार के लिए हुआ है इस बात को तर्कसंगत करना हम युवाओं का परम कर्तव्य होना चाहिए। इस कार्यक्रम में देश के बड़े गणमान्य पधारेंगे जो अपने आप में ही सबके लिए प्रेरणास्रोत हैं”।