हिन्दू हो या मुसलमान, पिछड़ा-पिछड़ा एक सामान

-हिन्दू हो या मुसलमान, पिछड़ा-पिछड़ा एक सामान
-किन्नर समुदाय का हो सम्मान पर आरक्षण की व्यवस्था अलग से हो
-ओबीसी सर्टिफिकेट सम्बन्धी विसंगतियों दूर करने को अल्टीमेटम

बीसीआर न्यूज़ (शिवानी जलोटा/नई दिल्ली): अति पिछड़ा वर्ग से सम्बन्ध रखने वाले दर्जन भर से अधिक बिरदरियों के नेताओं ने ओबीसी सर्टिफिकेट बनाए जाने सम्बन्धी नियमों में व्याप्त विसंगतियों को दूर करने के लिए सरकार को अल्टीमेटम दिया है कि या तो वर्ष 1992 के दस्तावेज प्रस्तुत करने की शर्त को हटाया जाय या फिर देश भर में इस वर्ग के लोग सरकार के खिलाफ सत्याग्रह करने को विवश होंगे।
आज यहां प्रैस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित प्रेस वार्ता में इंडियन बैकवर्ड कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष व दिल्ली राज्य हज समिति के पूर्व चेयरमैन हाजी अब्दुल समी सलमानी ने कहा कि हिन्दू मुस्लिम दोनों ही धर्मों में अति पिछड़ा वर्ग की भरी संख्या देश में निवास करती है। परन्तु बड़े अफ़सोस और खेद का विषय है कि आज़ादी के 70 साल बाद भी अति पिछड़ा वर्ग को उसका हक नहीं मिला। उन्होंने कहा कि देश के राजनैतिक दल अति पिछड़ा वर्ग का वोट हासिल कर सत्ता पर तो काबिज हो जाती है परन्तु इस वर्ग की उपेक्षा करती है।

कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष मोहम्मद शाहिद सिद्दीकी ने कहा कि पिछड़ा वर्ग आयोग को सवैंधानिक दर्जा देने में सरकार लगातार आनाकानी कर रही है तथा पिछड़ा वर्ग जाति सूची के उपवर्गीकरण के प्रारूप को भी सरकार सार्वजानिक नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय विश्विद्यालयों को जारी किये गए रोस्टर को भी रद्द किया जाय। उन्होंने देश के सभी राजनैतिक दलों को चेतावनी देते हुए कहा कि देश के आगामी किसी भी चुनाव में कांफ्रेंस उसी राजनैतिक दल को समर्थन देगी जो अपने घोषणा पत्र में कांफ्रेंस की मांगो को शामिल करेगा। तथा साथ ही अति पिछड़ा वर्ग को सत्ता में भागीदारी देगा। साथ ही उन्होंने कहा कि सभी राज्यों में पिछड़ी जाति के प्रमाण पत्र के लिए पांच वर्ष के निवास को प्रमाण मानकर प्रमाण पत्र जारी किये जाये।

इस अवसर पर वरिष्ठ अधिवक्ता महबूब सिद्दीकी ने कहा कि क्रीमीलेयर की अनिवार्यता को समाप्त किया जाये। उन्होंने कहा कि क्रीमीलेयर की अन्वार्यता आर्थिक आधार का समर्थन करती है जो असंवैधानिक है। उन्होंने राजनैतिक दलों को चेतावनी देते हुए कहा कि इतने बड़ी संख्या वर्ग की उपेक्षा बर्दाश्त नहीं की जायेगी। इसके लिए इन्डियन बैकवर्ड कांफ्रेंस के कार्यकर्ता जागरूकता अभियान चलाएंगे।

कॉन्फ्रेंस के महासचिव शमीम अहमद सैफी, सचिव हाजी इस्लामुद्दीन केसरी व कोषाध्यक्ष मोहम्मद ताहिर ने क्रीमी लेयर प्रमाणपत्र की वैधता एक वर्ष की जगह तीन वर्ष करने की मांग की है। इस अवसर पर कोषाध्यक्ष मोहम्मद ताहिर, मोहम्मद इरफान कुरैशी, नासिर अल्वी, हफीज अहमद हवारी, इश्हाक मलिक व फरहाना अंजुम आदि पदाधिकारियों ने अपने विचार प्रकट किये।